J&k : MLC ने कहा, 'मैं भी आतंकी बनना चाहता था'
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'मैं भी आतंकी बनना चाहता था। बंदूक उठा ही ली होती और आज शायद मैं जीवित भी नहीं होता। अगर सेना के एक अधिकारी ने मुझे समय पर मनोदशा बदलने का परामर्श न दिया होता।' नेकां के विधान परिषद के सदस्य कैसर जमशेद लोन ने सोमवार को राज्यपाल अभिभाषण पर सदन में हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए यह रहस्योद्घाटन किया।
जमशेद ने कहा वह नवमी कक्षा में पढ़ते थे कि लोलाब में हुए प्रदर्शन के बाद सेना ने उनके समेत करीब 80 युवाओं और किशोर को पकड़ लिया। थर्ड डिग्री देने से करीब 30 युवाओं की हालत अधमरे जैसी हो गई। उनकी हालत देख मन में आया आतंकी बनकर ही रहूंगा। हालांकि एक सैन्य अधिकारी ने उनकी मनोदशा में देखते हुए उचित परामर्श दिया और इससे उनका इरादा बदला।
उन्होंने कहा ज्यादती होती है। ऐसे में 2016 की 2010 वाली हिंसा से तुलना करना ठीक नहीं होगा। कोशिश होनी चाहिए कि युवाओं की मनोदशा को समझा जाए। इसके अलावा राज्यपाल अभिभाषण पर चर्चा में नेकां के सज्जाद अहमद किचलू ने भी हिस्सा लिया और कमियां दर्र्शाईं।
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा
भाजपा एमएलसी सुरेंद्र अंबरदार ने कहा कोशिश होनी चाहिए कि कश्मीर के युवा जो कि देश में आईएएस बनकर या वैज्ञानिक, खिलाड़ी और अन्य क्षेत्रों में नाम गौरवान्वित कर रहे हैं, उन्हें दर्शाया जाए, लेकिन शौकत गर्नेई जैसे एमएलसी बुरहान वानी का नाम लेते हैं, शौकत ने दिल तोड़ा है।
पीडीपी एमएलसी सुरेंद्र चौधरी ने राज्यपाल अभिभाषण के पक्ष में कहा कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती रियासत में शांति बहाली चाहती हैं। उनका साथ सत्तापक्ष के साथ-साथ विपक्ष को भी देना चाहिए। कांग्रेस के एमएलसी मुजफ्फर परे ने कहा कि राज्यपाल रियासत में संवैधानिक हैड हैं, लेकिन सरकार का मुखिया मुख्यमंत्री है।
ऐसे में राज्यपाल अभिभाषण में उनके द्वारा मेरी सरकार कहकर संबोधित करने पर सदन में चर्चा करवाए जाने और राज्यपाल अभिभाषण से मेरी सरकार शब्द को निकालने पर जोर दिया। इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चले कई मामलों का भी विवरण दिया।