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खनन माफिया ने बिगाड़ा रावी का इको सिस्टम
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 26 Jun 2016 11:48 PM IST
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सरहदी इलाके पर होने की वजह से हुआ अंधाधुंध दोहन
- फोटो : File Photo
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जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सरहद से बहने वाले रावी दरिया में अंधाधुंध खनन ने स्थानीय इको सिस्टम को बिगाड़ कर रख दिया है।
एसआरओ-105 लागू होने के बाद से चर्चा के केंद्र में आए खनन पर सरकार अब भले ही सख्ती दिखा रही हो, लेकिन सरहदी इलाके पर जिस तरह से दरिया के रेत, बजरी और पत्थरों का दोहन किया गया, उसका पैमाना हैरान करने वाला है।
कायदे से खनन के लिए तीन मीटर गहराई तक खोदने की अनुमति दी जाती है, लेकिन रावी दरिया में न सिर्फ वैध रूप से चल रहे स्टोन क्रेशर, बल्कि पूरी तरह से अवैध स्टोन क्रेशर बरसों लगातार खुदाई करते रहे। नतीजतन रावी का रिवर बेड खासा नीचे चला गया है। इससे कहीं भूमिगत पानी का स्तर नीचे चला गया है तो कहीं कृषि भूमि प्रभावित हुई है।
वर्तमान में खनन पर पूरी तरह से पाबंदी लागू है, जबकि जम्मू कश्मीर की हद में ही 37 स्टोन क्रेशर चलते थे। कोर्ट आदेश पर विभागीय जांच में सात स्टोन क्रेशर अवैध पाए गए थे। उधर पंजाब के स्टोन क्रेशर प्रबंधक भी रियासत की सरहद में आकर खनन करते रहे हैं। सूत्रों की मानें तो रावी से निकाले जाने वाले माइनर मिनरल को उत्तर भारत के कई राज्यों तक सप्लाई किया जाता है।
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जानलेवा बन रहे खनन से हुए गड्ढे
रावी पर बने रणजीत सागर बांध का पानी छोड़ने पर रावी में बाढ़ का मंजर उभरता है। रावी मार्ग से अमूमन लोग कठुआ से पंजाब की ओर या फिर इसी रूट पर वापसी करते हैं। रावी में चूंकि दस मीटर से भी अधिक गहरे असंख्य गड्ढे हैं तो पानी में बहने वाले लोग इन गड्ढों का शिकार हो जाते हैं। हाल के वर्षों में कई लोग इसी वजह से जान गंवा चुके हैं।
सबसे ज्यादा राजस्व भी देता है रावी का खनन
दरियाओं और दरियाई नालों से माइनर मिनरल से सरकार को राजस्व मिलता है। सबसे ज्यादा रावी दरिया से राजस्व मिलता है। बीते वर्ष सरकार को लगभग 19 करोड़ का राजस्व मिला जो इस बार 25 करोड़ तक प्रस्तावित माना जा रहा था, लेकिन एसआरओ-105 पर मचे बवाल से चंडीगढ़ की फर्म के नाम जारी लीज रद्द कर दी है।
हदबंदी पर असमंजस को भुनाता है खनन माफिया
रावी दो राज्यों की सरहद से सटी है। दरिया का कितना हिस्सा पंजाब में है और कितना जम्मू-कश्मीर में, इसे लेकर स्पष्ट सीमांकन नहीं है। प्रशासन ने निशानदेही के बाद कुछ पिल्लर लगाए थे जो बाढ़ में बह गए। इसका सीधा फायदा खनन माफिया उठाता रहा है। पंजाब के खनन माफिया को नियम उल्लंघन से रोकने पर कई मर्तबा ज्योलाजी एंड माइनिंग विभाग से लेकर पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट हो चुकी है।
उपाय किए, मगर लग गई रोक
रावी सहित रियासत के तमाम नदी-नालों में अंधाधुंध खनन पर अंकुश लगाने के लिए ज्योलाजी एंड माइनिंग विभाग ने नए नियम बनाए। पहली दफा माइनर मिनरल ब्लॉकिंग का क्षेत्र विस्तार बेहद छोटा कर दिया गया। इको फ्रेंडली खनन की नीति बनी, जिसके बाद एसआरओ-105 को लागू किया। पहले कोर्ट और उसके बाद सरकार ने अमल पर अस्थायी रोक लगा दी।
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एसआरओ-105 लागू होने के बाद से चर्चा के केंद्र में आए खनन पर सरकार अब भले ही सख्ती दिखा रही हो, लेकिन सरहदी इलाके पर जिस तरह से दरिया के रेत, बजरी और पत्थरों का दोहन किया गया, उसका पैमाना हैरान करने वाला है।
कायदे से खनन के लिए तीन मीटर गहराई तक खोदने की अनुमति दी जाती है, लेकिन रावी दरिया में न सिर्फ वैध रूप से चल रहे स्टोन क्रेशर, बल्कि पूरी तरह से अवैध स्टोन क्रेशर बरसों लगातार खुदाई करते रहे। नतीजतन रावी का रिवर बेड खासा नीचे चला गया है। इससे कहीं भूमिगत पानी का स्तर नीचे चला गया है तो कहीं कृषि भूमि प्रभावित हुई है।
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वर्तमान में खनन पर पूरी तरह से पाबंदी लागू है, जबकि जम्मू कश्मीर की हद में ही 37 स्टोन क्रेशर चलते थे। कोर्ट आदेश पर विभागीय जांच में सात स्टोन क्रेशर अवैध पाए गए थे। उधर पंजाब के स्टोन क्रेशर प्रबंधक भी रियासत की सरहद में आकर खनन करते रहे हैं। सूत्रों की मानें तो रावी से निकाले जाने वाले माइनर मिनरल को उत्तर भारत के कई राज्यों तक सप्लाई किया जाता है।
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जानलेवा बन रहे खनन से हुए गड्ढे
रावी पर बने रणजीत सागर बांध का पानी छोड़ने पर रावी में बाढ़ का मंजर उभरता है। रावी मार्ग से अमूमन लोग कठुआ से पंजाब की ओर या फिर इसी रूट पर वापसी करते हैं। रावी में चूंकि दस मीटर से भी अधिक गहरे असंख्य गड्ढे हैं तो पानी में बहने वाले लोग इन गड्ढों का शिकार हो जाते हैं। हाल के वर्षों में कई लोग इसी वजह से जान गंवा चुके हैं।
सबसे ज्यादा राजस्व भी देता है रावी का खनन
दरियाओं और दरियाई नालों से माइनर मिनरल से सरकार को राजस्व मिलता है। सबसे ज्यादा रावी दरिया से राजस्व मिलता है। बीते वर्ष सरकार को लगभग 19 करोड़ का राजस्व मिला जो इस बार 25 करोड़ तक प्रस्तावित माना जा रहा था, लेकिन एसआरओ-105 पर मचे बवाल से चंडीगढ़ की फर्म के नाम जारी लीज रद्द कर दी है।
हदबंदी पर असमंजस को भुनाता है खनन माफिया
रावी दो राज्यों की सरहद से सटी है। दरिया का कितना हिस्सा पंजाब में है और कितना जम्मू-कश्मीर में, इसे लेकर स्पष्ट सीमांकन नहीं है। प्रशासन ने निशानदेही के बाद कुछ पिल्लर लगाए थे जो बाढ़ में बह गए। इसका सीधा फायदा खनन माफिया उठाता रहा है। पंजाब के खनन माफिया को नियम उल्लंघन से रोकने पर कई मर्तबा ज्योलाजी एंड माइनिंग विभाग से लेकर पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट हो चुकी है।
उपाय किए, मगर लग गई रोक
रावी सहित रियासत के तमाम नदी-नालों में अंधाधुंध खनन पर अंकुश लगाने के लिए ज्योलाजी एंड माइनिंग विभाग ने नए नियम बनाए। पहली दफा माइनर मिनरल ब्लॉकिंग का क्षेत्र विस्तार बेहद छोटा कर दिया गया। इको फ्रेंडली खनन की नीति बनी, जिसके बाद एसआरओ-105 को लागू किया। पहले कोर्ट और उसके बाद सरकार ने अमल पर अस्थायी रोक लगा दी।