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बारूद की गंध के बीच मिल्ककेक की सोंधी सी महक

Thu, 21 Aug 2014 02:54 AM IST
Updated Thu, 21 Aug 2014 02:54 AM IST
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milk cake making at indo-pak border
इस इलाके में मिल्ककेक की सोंधी खुशबू बारूदी गंध पर भारी पड़ रही है। पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आता और अक्सर जफायर का उल्लंघन कर गोलाबारी शुरू कर देता है। सीमांत ग्रामीणों के लिए इन दिनों हर रात मुश्किल भरी होती है।
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मौत का खौफ हर पल मंडराता रहता है लेकिन जिंदादिल ग्रामीण सुबह होते ही फिर से अपनी रोजी-रोटी के लिए काम में जुट जाते हैं। खेतों में जाने से डर जरूर लगता है और अधिक फायरिंग की स्थिति में किसान घरों से बाहर भी निकलते लेकिन मिल्ककेक के धंधे पर फायरिंग का कोई असर नहीं होता।

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इस मिल्ककेक की प्रसिद्धि दूर-दूर तक है। इस कारण ग्राहक हर दिन अब्दुल्लियां तक आकर इस जायकेदार मिठाई को ले जाते हैं। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर बीएसएफ इसी मिल्ककेक के पैकेट पाकिस्तानी रेंजरों को सौगात के रूप में देते हैं।
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अब्दुल्लियां गांव में होता है यह कारोबार

milk cake making at indo-pak border

हालांकि, इसकी मिठास के बावजूद पाक अपनी कड़वाहट नहीं छोड़ता। आरएसपुरा से लगभग तीन किलोमीटर दूर बसे अब्दुल्लियां गांव में मिल्ककेक का कारोबार लंबे समय से चल रहा है। ग्रामीण अच्छी नस्ल की गायें पालते हैं जिससे पर्याप्त मात्रा में दूध मिलता है।

हर घर में दो-चार गायें हैं। अच्छी फसल और घास के हरे भरे मैदान से गायों के लिए पौष्टिक चारा गांव के पास ही उपलब्ध हो जाता है। पाकिस्तान की ओर से जब फायरिंग तेज होती है तब चारा संकट भी पैदा होता है। ऐसे हालात के लिए किसान घरों में पहले से चारे का भंडार रखते हैं।

यहां बने मिल्ककेक की क्वालिटी उत्तम मानी जाती है। इसमें स्वाद भी है और खुशबू भी। इस वजह से से इसकी मांग अधिक है। मिल्ककेक सूखा बनता है इसलिए यह सप्ताह भर तक खराब भी नहीं होता। इसकी सप्लाई मुंबई, दिल्ली और देश के अन्य शहरों में भी होती है।

बीएसएफ की ओर से पाक को भी दी जाती है भेंट

milk cake making at indo-pak border

अब्दुल्लियां में मिल्ककेक की दर्जन भर से अधिक दुकानें हैं। छोटी-छोटी दुकानें जिनमें न तो कोई इश्तेहार है और न ही कोई तामझाम। दुकान के अंदर काउंटर पर रखे पैकेट बताते हैं कि किस दुकान को कितना आर्डर मिला है। हर दुकानदार प्रतिदिन 10 से 20 किलो मिल्ककेक ही बनाता है।

इसे हिफाजत से रखने के बाद ग्राहकों को आर्डर के हिसाब से आपूर्ति की जाती है। त्योहारों और शादी के मौसम में आर्डर बढ़ जाता है, तब मांग पूरा कर पाना संभव नहीं होता। दुकानों की इस गली में घुसते ही मिल्लकेक की खुशबू ध्यान खींचती है।

आरएसपुरा के व्यापारी यहां से थोक में मिल्ककेक लेकर बाहर सप्लाई करते हैं लेकिन गांव के कारोबारी इसे बेचने के लिए कहीं बाहर नहीं जाते। ग्राहक उनके दरवाजे तक आते हैं। मिल्ककेक के कारोबार से जुड़े इस गांव के मोहनलाल कहते हैं कि पाकिस्तान का कोई इलाज नहीं है।

वह बेवजह फायरिंग करता है। गोलाबारी से बचने के लिए गांव में बंकर है और लोग अपने घरों में दुबक जाते हैं लेकिन पाक के डर से कारोबार को बंद नहीं किया जा सकता। मिल्ककेक के कारोबार में पीमा शाह का नाम काफी पुराना है। वह कहते हैं पाकिस्तान की ओर से लगातार गोलाबारी होती रही लेकिन मिल्लकेक की दुकानें कभी बंद नहीं हुईं।

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