सेना की वर्दी पहनकर हमलों को अंजाम दे रहे आतंकी
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प्रतिबंध लगने के बाद भी सेना की वर्दी किसी भी कपड़े की दुकान से खरीदी जा सकती है। शायद यही कारण है कि आतंकी इसका जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। पिछले अधिकतर हमलों पर नजर डालें तो आतंकियों ने घटनाओं को सेना की वर्दी पहनकर अंजाम दिया।
सेना की वर्दी पहनकर वे आसानी से सैन्य शिविरों तक पहुंच जाते हैं और फिर अपने नापाक मंसूबों को कामयाब बना देते हैं। भारतीय सेना के समाज में लोकप्रिय होने का फायदा आतंकी सेना की वर्दी पहन कर खूब उठा रहे हैं। सेना की वर्दी पहनकर आसानी से लोगों से रूबरू हो जाते हैं और हर जरूरी जानकारी ले लेते हैं। लोग भी इनके ऊपर यकीन कर लेते हैं।
जानकारी के अनुसार शहर में कपड़े की दुकानों पर सेना की वर्दी उपलब्ध है। इनकी बिक्री सिर्फ सेना के जवानों के लिए है, लेकिन इसे कोई भी खरीद सकता है। अगर कोई आनाकानी करे भी तो महंगे दाम मे बेच दी जाती है। फैशन के तौर पर भी युवाओं में सैन्य वर्दी की पेंट और शर्ट पहनने का क्रेज है।
रेलवे स्टेशन पर तो कई ऐसी दुकानें हैं, जहां पर सेना की वर्दी खुले में बिकती है। शहर के आसपास के इलाकों में भी इसकी ब्रिकी आम है। अंतर्राष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा के पास सटे इलाकों की मार्केट में भी सेना की वर्दी उपलब्ध है, यहां से कोई भी इसे खरीद सकता है।
सेना की वर्दी का इस तरह से इस्तेमाल होना किस कदर नुकसान पहुंचा सकता है, इसका प्रमाण आतंकी हमले दे रहे हैं। आतंकी वर्दी पहन कर किसी भी वाहन में लिफ्ट ले लेते हैं और किसी से भी बात कर सकते हैं।
कब-कब हुआ वर्दी का इस्तेमाल
राज्य में हुए अधिकतर आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए आतंकियों ने सेना की वर्दी का इस्तेमाल किया। 2008 में चिन्नौर में हुई मुठभेड़ में आतंकी सेना की वर्दी पहने हुए थे। 2009 में सांबा में हुए आतंकी हमले में आतंकियों ने सेना की वर्दी पहन रखी थी।
2013 में आतंकियों ने कठुआ में पुलिस स्टेशन और सांबा में आर्मी कैंप पर हमला किया और इसमें भी सेना की वर्दी पहन रखी थी। अभी दो दिन पहले ही अरनियां में हमला हुआ। यहां भी चारों आतंकियों ने सेना की वर्दी पहन रखी थी। आतंकी सेना की वर्दी का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं।
मेहनत पर फैशन भारी-
जिस वर्दी को पहनने के लिए सेना के जवानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है, वही सेना की वर्दी फैशन के लिए इस्तेमाल करने में 500 से 1000 रुपये में मिल जाती है। फौजी पैंट और शर्ट का युवाओं में काफी क्रेज है।
सेना की वर्दी के खुले में बिकने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इसके बावजूद इसका इस्तेमाल होना चिंता का विषय है। सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश जारी किए जाएंगे कि सेना की वर्दी का बिक्री करने वालों पर एक विशेष रणनीति के तहत कार्रवाई की जाए। सिर्फ उन्हीं लोगों को वर्दी दी जाए, जिनके पास सेना का आई कार्ड हो। (प्रधान सचिव, गृह विभाग, सुरेश कुमार)