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प्रवासी पक्षियों ने घाटी में बिखेर दी चमक
Updated Wed, 18 Nov 2015 12:02 PM IST
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घाटी के वेटलैंड में हर वर्ष की तरह इस बार भी लाखों की संख्या में प्रवासी पक्षियों के पहुंचे का सिलसिला शुरू हो गया है। जिसके चलते वेटलैंड में रंग बिरंगे पक्षियों की चहचहाहट सुनने को मिल रही है।
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ये पक्षी साइबेरिया, चीन, पूर्वी यूरोप और अन्य क्षेत्रों से हर वर्ष भीषण ठंड से बचने के लिए कश्मीर के वेटलैंड का रुख करते हैं। कश्मीर वेटलैंड के वार्डन इम्तियाज लोन के अनुसार अक्टूबर के पहले हफ्ते से ही धीरे धीरे इन प्रवासी पक्षियों का घाटी के वेटलै़ंड में आना शुरू हो जाता है। यह सिलसिला फरवरी के अंत तक जारी रहता है।
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लोन के अनुसार पतझड़ के साथ ही जैसे ही मौसम में बदलाव आना शुरू होता है, ये प्रवासी पक्षी होकरसर वेटलैंड के अलावा शालाबुग, मिर्गुण्ड आदि वेटलैंड में पहुंच जाते हैं।
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ढाई लाख से ज्यादा पक्षी
गौरतलब है कि अभी तक होकरसर वेटलैंड में ढाई लाख से ज्यादा प्रवासी पक्षी पहुंच चुके हैं। जिनमें मल्लार्ड, कॉमन टील्स, गड्वाल्स, पिनटेल्स और कूट जैसी प्रजातियां शामिल हैं।
वेटलैंड वार्डन के अनुसार अगले कुछ हफ्तों के भीतर ग्रेलैग गीज, विजंज़, पोचार्ड, शॉवेलेर जैसी प्रजातियां भी कश्मीर में आना शुरू जाएंगी। इनमें से कुछ प्रजातियां ऐसी हैं जो शरद ऋतु की शुरुआत तक यहां रहना पसंद करती हैं।
वहीं एक अच्छी बात यह है कि कश्मीर की इस शानदार विरासत की रक्षा के लिए जागरूकता विशेष रूप से युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रही है। कई स्कूली बच्चे सुरक्षित वातावरण में इन प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए प्रत्येक सप्ताह होकरसर वेटलैंड रिजर्व पहुंच रहे हैं।
वेटलैंड वार्डन के अनुसार अगले कुछ हफ्तों के भीतर ग्रेलैग गीज, विजंज़, पोचार्ड, शॉवेलेर जैसी प्रजातियां भी कश्मीर में आना शुरू जाएंगी। इनमें से कुछ प्रजातियां ऐसी हैं जो शरद ऋतु की शुरुआत तक यहां रहना पसंद करती हैं।
वहीं एक अच्छी बात यह है कि कश्मीर की इस शानदार विरासत की रक्षा के लिए जागरूकता विशेष रूप से युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रही है। कई स्कूली बच्चे सुरक्षित वातावरण में इन प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए प्रत्येक सप्ताह होकरसर वेटलैंड रिजर्व पहुंच रहे हैं।