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'कश्मीर में हिंसा ने खेल मैदानों को बना दिया कब्रिस्तान'
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Wed, 24 Aug 2016 11:10 PM IST
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महबूबा मुफ्ती
- फोटो : File Photo
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने हिंसा पर प्रहार करते हुए कहा कि इससे कभी किसी समस्या का हल नहीं होता। हिंसा केवल दर्द ही बढ़ाती है। पिछले ढाई दशक की हिंसा ने कश्मीर के खेल मैदानों को कब्रिस्तानों में तब्दील कर दिया है।
उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर की समस्याओं को संवाद के जरिये होने वाले हल की जरूरत है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ वर्गों से बावस्ता युवा हिंसा के मार्ग पर चलते हुए कश्मीर समस्या के समाधान की राह में परेशानियां खड़ी कर रहे हैं। महबूबा एसआरओ-43 के तहत नियुक्ति पत्र वितरित करने के लिए आयोजित समारोह को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर ने पिछले 26 वर्ष लगातार तबाही के मंजर देखे हैं। सभी का मकसद हिंसा के चक्र से रियासत को बाहर निकालना होना चाहिए था, लेकिन इतने लंबे अरसे में कुछ भी नहीं बदल पाया। अमन और संवाद से समस्या हल करने के बजाय हिंसा से कश्मीर की त्रासदियां बढ़ाई गईं। खुशियाें से आबाद रहने वाले घरों में विलाप और सदमे का आलम है।
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उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर की समस्याओं को संवाद के जरिये होने वाले हल की जरूरत है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ वर्गों से बावस्ता युवा हिंसा के मार्ग पर चलते हुए कश्मीर समस्या के समाधान की राह में परेशानियां खड़ी कर रहे हैं। महबूबा एसआरओ-43 के तहत नियुक्ति पत्र वितरित करने के लिए आयोजित समारोह को संबोधित कर रही थीं।
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उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर ने पिछले 26 वर्ष लगातार तबाही के मंजर देखे हैं। सभी का मकसद हिंसा के चक्र से रियासत को बाहर निकालना होना चाहिए था, लेकिन इतने लंबे अरसे में कुछ भी नहीं बदल पाया। अमन और संवाद से समस्या हल करने के बजाय हिंसा से कश्मीर की त्रासदियां बढ़ाई गईं। खुशियाें से आबाद रहने वाले घरों में विलाप और सदमे का आलम है।
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वाजपेयी की कोशिशों का दिखा था असर
सीएम महबूबा मुफ्ती के साथ डिप्टी सीएम
- फोटो : Amar Ujala
महबूबा ने पूछा अवाम ही मुझे बताए आखिर समस्या का हल कैसे होगा। यदि मेज के दोनों तरफ बैठकर बातचीत नहीं करते हैं तो और क्या तरीका हो सकता है। महबूबा ने कहा वर्ष 2002 में एनडीए सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में नई सोच के साथ कोशिशें शुरू कीं, जिसका असर भी देखने को मिला, लेकिन बाद में हालात फिर बिगड़ गए।
महबूबा ने कहा कि राज्य सरकार यह मानती है कि जब तक लोगाें को शामिल किए बिना कुछ भी किया जाए तो मान्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि हिंसा के शिकार हुए परिवार दयनीय स्थिति में हैं। उन्हें अपने वजूद के लिए कई दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।
इससे पूर्व महबूबा मुफ्ती ने एसआरओ-43 के तहत 106 नियुक्ति पत्र बांटे। इन युवाओं के परिवार से कोई न कोई सदस्य सरकारी नौकरी के सेवाकाल के दौरान मृत्यु का शिकार हो गया था। मानवीय आधार पर परिवार के किसी एक सदस्य को नौकरी दी जाती है।
महबूबा ने कहा कि राज्य सरकार यह मानती है कि जब तक लोगाें को शामिल किए बिना कुछ भी किया जाए तो मान्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि हिंसा के शिकार हुए परिवार दयनीय स्थिति में हैं। उन्हें अपने वजूद के लिए कई दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।
इससे पूर्व महबूबा मुफ्ती ने एसआरओ-43 के तहत 106 नियुक्ति पत्र बांटे। इन युवाओं के परिवार से कोई न कोई सदस्य सरकारी नौकरी के सेवाकाल के दौरान मृत्यु का शिकार हो गया था। मानवीय आधार पर परिवार के किसी एक सदस्य को नौकरी दी जाती है।