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महबूबा पहुंची जम्मू, दोबारा अध्यक्ष बनना तय

Fri, 23 Jan 2015 01:09 PM IST
Updated Fri, 23 Jan 2015 01:09 PM IST
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Mehbooba Mufti may get re-elected as a party president

पीडीपी संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के बाद अब पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती भी जम्मू आ गई हैं। मुफ्ती तथा महबूबा दोनों के जम्मू में होने से सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बीच शनिवार यानी 24 जनवरी को पार्टी संविधान के अनुसार इलेक्टोरल कालेज (मतदान के अधिकारी सदस्यों का समूह) नए अध्यक्ष का चुनाव करेगा।

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महबूबा की दोबारा इस पद पर ताजपोशी तय मानी जा रही है। सबसे खास बात यह होगी कि नए अध्यक्ष के चुनाव के साथ ही नई सरकार के स्वरूप तथा राज्यसभा चुनाव के लिए संभावित गठजोड़ पर भी चर्चा होगी। इस वजह से इस दिन पीडीपी के टाप स्तर के नेताओं के जमावड़े पर राजनीतिक दलों की पैनी नजर है।
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विधानसभा चुनाव के परिणाम की घोषणा के बाद यह पहला मौका है जब पीडीपी के टाप स्तर के नेताओं का एक साथ जमावड़ा हो रहा है। इलेक्टोरल कालेज में सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक और विभिन्न क्षेत्रों के जोनल प्रतिनिधि होते हैं।
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अध्यक्ष चुनाव का कार्यक्रम ही तय

Mehbooba Mufti may get re-elected as a party president

कालेज के सदस्यों की संख्या लगभग 250 है। पीडीपी सूत्रों का कहना है कि चुनाव बाद विधायकों से गठजोड़ पर तो रायशुमारी की गई है, लेकिन क्षेत्रीय प्रतिनिधियों से चर्चा संभव नहीं हो पाई थी। इस वजह से यहां चुनाव के बहाने रियासत की राजनीतिक अस्थिरता को तोड़ने के लिए पार्टी की ओर से उठाए जा रहे कदम पर चर्चा हो सकती है।  

हालांकि, पीडीपी के आधिकारिक प्रवक्ता का कहना है कि इलेक्ट्राल कालेज केवल नए अध्यक्ष का चुनाव करेगा। अन्य विषयों पर चर्चा होगी, यह कहना मुश्किल है। फिलहाल अध्यक्ष चुनाव का कार्यक्रम ही तय है।

उधर, राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा और पीडीपी के बीच सियासी गतिरोध की जमी बर्फ तेजी से पिघलनी शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि भाजपा के साथ पीडीपी का गठबंधन लगभग तय हो गया है। बस अब इसकी औपचारिक घोषणा भर होना बाकी है।

भाजपा दिल्ली चुनाव को देखते हुए पीडीपी से गठबंधन का ऐलान कर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है, लेकिन दोनों दलों के समक्ष राज्यसभा की चार सीटों पर कब्जा के लिए आपसी सहमति बनाने की मजबूरी है। सियासी पंडितों का कहना है कि इस सहमति की भले ही औपचारिक घोषणा न हो, लेकिन राज्यसभा के प्रत्याशियों की घोषणा या फिर वोटिंग ट्रेंड से सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।

राज्यसभा की दो-दो सीटों पर बन सकती है सहमति

Mehbooba Mufti may get re-elected as a party president

राज्यसभा की चार में से दो-दो सीटों पर कब्जा करने की रणनीति के तहत भाजपा-पीडीपी में सहमति बन सकती है। पीडीपी के 28 और भाजपा के 25 विधायक हैं। इस नाते दोनों के पास एक-एक सीट जीतने की क्षमता है।

दूसरी सीट के लिए दोनों को एक दूसरे का साथ चाहिए। पिछले चुनाव में नेकां तथा कांग्रेस ने आपसी सहमति के आधार पर दो-दो सीटों पर कब्जा जमाया था। राज्यसभा की यह सहमति नई सरकार के स्वरूप को भी उजागर करेगी।

राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना के बाद पर्याप्त संख्या बल न होने के नाते नेकां और कांग्रेस वेट एंड वाच की स्थिति में है। दोनों दलों को पीडीपी और भाजपा के कदम का इंतजार है। इस बीच नेकां-कांग्रेस के बीच सहमति की खिचड़ी भी पक रही है।

कांग्रेस गुलाम नबी आजाद के लिए प्रयासरत है तो पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने डा. फारुक अब्दुल्ला को राज्यसभा भेजने की वकालत की है। इससे इन दोनों दलों के बीच बात बनती नहीं दिख रही है।

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