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वापस मिले भी तो पावर प्रोजेक्टों का संचालन आसान नहीं

Wed, 25 May 2016 11:31 AM IST
ओमपाल संब्याल, अमर उजाला/जम्मू
ओमपाल संब्याल, अमर उजाला/जम्मू Updated Wed, 25 May 2016 11:31 AM IST
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many problems in Pawar projects
बिना निवेश के राज्य को मिल रहे हैं कई फायदे - फोटो : File Photo
एनएचपीसी द्वारा संचालित पनबिजली परियोजनाओं को राज्य सरकार को लौटाने का मुद्दा फिर से गरमा गया है। राज्य से उठाई जा रही प्रोजेक्ट वापसी की मांग को सिरे से खारिज करते हुए जहां केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने इसे नीतिगत सीमाओं का तर्क देते हुए नामुमकिन बताया है, वहीं राज्य के वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू दावा कर रहे हैं कि प्रोजेक्ट वापसी के लिए केंद्र से बातचीत चल रही है।
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ऐसे में एनएचपीसी के पावर प्रोजेक्टों को लेकर फिर से असमंजस की स्थिति बन गई है। इस सब के बीच यदि प्रोजेक्ट वापसी को मुमकिन मान भी लिया जाए तो रियासत के लिए एनएचपीसी की विशालकाय परियोजनाओं का संचालन टेढ़ी खीर होगा। खासकर सलाल परियोजना जिसे खुद एनएचपीसी एक सिक चाइल्ड मानती है। 
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एनएचपीसी के पास रहते यह प्रोजेक्ट राज्य सरकार के लिए नफे का सौदा साबित हो रहा है। अधिकारिक आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो 690 मेगावाट क्षमता के इस प्रोजेक्ट से राज्य को 12 फीसदी बिजली मुफ्त मिलती है। इसके अलावा राज्य को प्रोजेक्ट से पैदा होने वाली 25 फीसदी बिजली बज बार रेट पर मिलती है।
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​उदासीन करता है सेवा-3 का उदाहरण 

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पावर प्रोजेक्ट - फोटो : अमर उजाला
बज बार रेट का मतलब एनएचपीसी बिना कोई फायदा कमाए लागत मूल्य पर ही बिजली राज्य को देती है। इससे भी बढ़कर सलाल परियोजना के माध्यम से एनएचपीसी राज्य सरकार को सालाना 374 करोड़ रुपये का भुगतान बतौर वाटर यूसेज टैक्स अदा करती है।

एनएचपीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि राज्य सरकार को लागत मूल्य पर मिलने वाली बिजली का मूल्यांकन करें तो बाजार मूल्य की तुलना में राज्य को 300 करोड़ से अधिक का लाभ होता है। प्रोजेक्ट ट्रांसफर होने का सीधा मतलब बिना किसी निवेश के उक्त तमाम फायदों से हाथ धोना होगा।


जम्मू कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन के सेवा-3 पावर प्रोजेक्ट का हश्र सरकारी उदासीनता की नजीर है। कठुआ जिले के माश्का गांव में स्थित 9 मेगावाट का यह प्रोजेक्ट वर्ष 2003 में कमीशन हुआ। वर्ष 2013 के अगस्त महीने में पावर कनाल टूटने से प्रोजेक्ट बंद हो गया। इसे बहाल करने के लिए 7 करोड़ की जरूरत पड़ी जो सरकार आज तक नहीं दे पाई है। प्रोजेक्ट पूरी तरह से ठप पड़ा है।

सिल्ट से बिगड़ रही है सलाल प्रोजेक्ट की सेहत
रियासी जिले में एनएचपीसी द्वारा संचालित सलाल परियोजना की सेहत लगातार खराब होती जा रही है। राज्य में एनएचपीसी की सबसे पुरानी इस परियोजना को चलाना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। सलाल प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान वरिष्ठ ओहदे पर कार्य कर चुके एक अफसर ने बताया कि चिनाब में सिल्ट और पत्थरों के जमने की प्रक्रिया बेहद तेज है। प्रोजेक्ट की बनावट भी ऐसी है, जहां पर सिल्ट को पूरी तरह से हटाना मुमकिन नहीं है। लगभग 700 मुलाजिमों का अमला होने के बावजूद प्रोजेक्ट के रखरखाव में दिक्कतें आती हैं।
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