सुनंदा हत्याकांड: तीनों संदिग्धों का होगा पॉलीग्राफ टेस्ट
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पुलिस का कहना है कि सुनंदा की मौत के दिन 17 जनवरी 2014 को यह तीनों संदिग्ध होटल लीला पैलेस के उस कमरा नंबर 345 में थे जहां उसकी कथित तौर पर हत्या हुई थी।
पुलिस को शक है कि यह तीनों गवाह सुनंदा की पाक पत्रकार मेहर तरार से झगड़े के बारे में कई बातें छिपा रहे हैं। सुनंदा पुष्कर ने प्रेस कान्फ्रेंस कर थरूर का पर्दाफाश करने की धमकी दी थी। यह गवाह इससे जुड़े तथ्य भी छिपा रहे हैं।
अपने आवेदन में पुलिस ने कहा है कि सुनंदा की जांच के लिए संजय दीवान द्वारा बजरंगी को डॉक्टर रजत मोहन को लेने के लिए सरोजनी नगर से पटेल नगर भेजने का निर्णय कई सवाल खड़े करता है जबकि होटल लीला पैलेस में खुद इन-हाउस डॉक्टर उपलब्ध था।
कुछ छिपा रहे हैं तीनों आरोपी
सुनंदा पुष्कर हत्या मामले में तीन संदिग्धों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की अनुमति बुधवार को अदालत ने दिल्ली पुलिस को प्रदान कर दी। पुलिस ने सुनंदा व थरूर के मित्र संजय दीवान, नौकर बजरंगी व ड्राइवर नारायण सिंह पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए टेस्ट की अनुमति मांगी थी।
पटियाला हाउस अदालत के एमएम सुनील कुमार शर्मा ने पुलिस के आवेदन पर सुनवाई के बाद तीनों संदिग्धों का पॉलीग्राफ टेस्ट राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग व सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के मुताबिक कराने की अनुमति प्रदान कर दी। अदालत ने कहा कि पॉलीग्राफ टेस्ट की सूचना पहले पुलिस देगी।
पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान संदिग्धों के वकील वहां रहेंगे ताकि वह पुलिस के सवालों को सुन सकें। पुलिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि इन तीनों संदिग्धों से पूछताछ की गई थी, लेकिन, यह तीनों सुनंदा के शरीर पर चोटों, होटल के कमरे में पावर कट समेत कई अहम तथ्य छिपा रहे हैं।
प्रेस कांफ्रेंस करने वाली थीं सुनंदा
वह यह भी नहीं बता रहे कि सुनंदा पुष्कर प्रेस कान्फ्रेंस करके कौन सा खुलासा करने वाली थीं। पुलिस ने कहा कि संजय दीवान यह नहीं बता रहे कि वह मुंबई की ट्रिप कैंसल करके दिल्ली क्यों आए और वह अपने मोबाइल के बारे में भी सही जानकारी नहीं दे रहे हैं।
संदिग्ध संजय दीवान की ओर से बहस करते हुए अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि टेस्ट के नतीजों को मुकदमे में साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट यह कह चुका है कि पॉलीग्राफ टेस्ट आरोपी या गवाह की मंजूरी से ही किया जा सकता है और इसके लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग व सुप्रीम कोर्ट ने दिशा निर्देश भी जारी कर रखे हैं।
टेस्ट से पहले पुलिस को अपने सवालों की सूची कोर्ट को देनी होती है और किसी भी शख्स के वकील की मौजूदगी में ही टेस्ट किया जा सकता है।