लश्कर-ए-तैयबा ने दक्षिण कश्मीर को बनाया अपना मजबूत किला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सर्जिकल स्ट्राइक के ढाई महीने बाद ही लश्कर-ए -तैयबा ने दक्षिण कश्मीर को फिर से मजबूत किला बना लिया है। लश्कर के नेटवर्क विस्तार से सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हुईं हैं। एजेंसियों को झेलम नदी से आतंकियों की घुसपैठ के इनपुट मिले हैं। झेलम से सटे पांपोर में सेना के काफिले पर हुए हमले से घुसपैठ की सूचना की तसदीक हुई है।
आतंकी पांपोर में इससे पहले भी सीआरपीएफ और सेना के काफिलों को निशाना बना चुके हैं। पांपोर में ही उद्यमिता विकास संस्थान के भवन पर आतंकियों ने कब्जा कर लिया था। उसे खाली कराने में सुरक्षा बलों को 60 घंटे लग गए थे। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक दक्षिण कश्मीर के पुलवामा, शोपियां, कुपवाड़ा और कुलगाम में लश्कर के आतंकियों को ठौर मिल रहा है।
नोटबंदी से आतंकियों और उपद्रवियों को नकदी मिलना बंद हो गई थी। इस कारण हिंसा, उपद्रव और आतंकी हमले की वारदातों में भी कुछ दिनों तक कमी आई। लश्कर ने अब बैंक लूट से नकदी लूटने की वारदातों को अंजाम देना शुरू किया है। हवाला नेटवर्क फिर सक्रिय हुआ है। इसके माध्यम से उपद्रवियों को फंड भी मिलने लगा है।
सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट हैं कि आतंकियों के फिदायीन हमले और बढ़ सकते हैं। इस साल अब तक सात फिदायीन हमले हो चुके हैं। इनमें 39 सुरक्षा कर्मी और सैनिक शहीद हुए। इससे पहले 2014 में दो फिदायीन हमलों में 14 जवान और 2015 में चार फिदायीन हमलों में 5 जवान शहीद हुए थे।
उड़ी और नगरोटा में सैन्य शिविरों पर हुए फिदायीन हमलों की जांच कर रही एनआईए को आतंकियों की हाई-टेक शैली ने चौंकाया है। लश्कर-ए-तैयबा ने सर्जिकल स्ट्राइक में तबाह हुए पीओके के कैंपों और लांचिंग पेड को फिर से जिंदा कर लिया है। इस कारण सुरक्षा बलों की चुनौतियां बढ़ गईं हैं।
हर महीने आतंकियो से औसतन 9 मुठभेड़
104 जवान घायल भी हुए। इससे पहले 2014 में 57 मुठभेड़ में 26 जवान शहीद हुए और 2015 में 63 मुठभेड़ में 39 जवान शहीद हुए थे।