जानें क्यों, घाटी से गायब होने लगे हैं पत्थरबाज
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घाटी के पत्थरबाज अब भूमिगत होने लगे हैं। पहले की तरह अब पत्थरबाज गिरोह सक्रिय नहीं हैं। एनआईए की ओर से अलगाववादियों पर शिकंजा कसने और पिछले दिनों दो शातिर पत्थरबाजों की गिरफ्तारी के बाद से तो पत्थरबाजी की घटनाओं में और कमी आई है।
यही वजह है कि लश्कर कमांडर अबु इस्माइल के मारे जाने के बाद कहीं भी विरोध प्रदर्शन तथा सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी नहीं हुई।जुमे की नमाज भी सकुशल संपन्न हो गई और कहीं से भी सुरक्षा बलों से टकराव की खबर नहीं है।
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एनआईए की ओर से घाटी में सक्रिय 77 ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप चिह्नित किए गए हैं, जो मुठभेड़ शुरू होते ही भीड़ को मुठभेड़ स्थल तक पहुंचकर सुरक्षा बलों पर पथराव के लिए भड़काते थे।
इनमें से कई ग्रुप में पाकिस्तान के लोग भी शामिल हैं। एनआईए ने छानबीन के बाद घाटी से दो शातिर पत्थरबाजों को गिरफ्तार किया।
एनआईए ने 77 व्हाट्सएप ग्रुप चिह्नित कर कसा है शिकंजा
इसके बाद से पत्थरबाज गिरोहों में हड़कंप मच गया। पत्थरबाजों के सरगना लगभग भूमिगत हो गए हैं। कार्रवाई के भय से कुछ तो जम्मू तथा अन्य राज्यों की ओर निकल चुके हैं। कश्मीर के कई इलाकों में पत्थरबाजों के जाने-माने चेहरे नजर नहीं आ रहे हैं।
पुलिस, सेना तथा सीआरपीएफ का भी मानना है कि पत्थरबाजी में कमी आई है। अब आम कश्मीरी मुठभेड़ स्थल तक पहुंचकर पत्थरबाजी नहीं करना चाहता है।उसे हकीकत का पता चल चुका है। आईजी मुनीर खान का कहना है कि कश्मीर का युवा अब किसी प्रकार की हिंसा तथा पत्थरबाजी नहीं चाहता है। .
वह अपने कॅरियर के प्रति ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहा है। यही वजह है कि जब कभी भी पुलिस तथा सेना भर्ती रैली होती है तो उसमें युवक-युवतियों की भीड़ उमड़ रही है।