{"_id":"5fbf95c7a7ba7d09ff1266a5","slug":"know-everything-about-roshni-act-scam-jammu","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्या है रोशनी एक्ट घोटाला, जिसने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में मचा रखी है हलचल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
क्या है रोशनी एक्ट घोटाला, जिसने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में मचा रखी है हलचल
Thu, 26 Nov 2020 06:55 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Thu, 26 Nov 2020 06:55 PM IST
विज्ञापन
रोशनी एक्ट घोटाला
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू कश्मीर के प्रमुख लेखाकार (सीएजी) ने रोशनी एक्ट के तहत हुए 25,500 करोड़ रुपये के घोटाले की रिपोर्ट दी है। यह राज्य का सबसे बड़ा घोटाला है और इसने सूबे की सियासत को हिला दिया है। इसमें राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के दामन पर भी दाग लगे हैं। दरअसल, जम्मू के सजवान क्षेत्र में फारूक अब्दुल्ला का मकान है, जो 10 कनाल (पांच कनाल = 1 बीघा) जमीन पर बना हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
आरोप है कि इस 10 कनाल जमीन में से तीन कनाल जमीन फारूक अब्दुल्ला की है, जबकि बाकी सात कनाल जंगल की है। बताया जा रहा है कि इस अतिरिक्त भूमि पर रोशनी एक्ट के तहत कब्जा किया गया है। इसके बाद से मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इसमें कई नेताओं और नौकरशाहों के नाम शामिल होने की बात कही जा रही है।
विज्ञापन
यह है रोशनी जमीन घोटाला
उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर राज्य भूमि अधिनियम, 2001 को तत्कालीन फारूक अब्दुल्ला सरकार ने जल विद्युत परियोजनाओं के लिए फंड एकत्रित करने के उद्देश्य से बनाया था। इस कानून को 'रोशनी' नाम दिया गया था। इसके अनुसार, भूमि का मालिकाना हक उसके अनधिकृत कब्जेदारों को इस शर्त पर दिया जाना था कि वे बाजार भाव पर सरकार को भूमि की कीमत का भुगतान करेंगे। इसके लिए कटऑफ मूल्य 1990 की गाइडलाइन के अनुसार तय किए गए थे। शुरुआत में सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले किसानों को कृषि के लिए मालिकाना हक दिया गया।
हालांकि, इस अधिनियम में दो बार संशोधन किए गए, जो मुफ्ती मोहम्मद सईद और गुलाम नबी आजाद की सरकार के कार्यकाल में हुए। उस दौरान कटऑफ मूल्य पहले 2004 और बाद में 2007 के हिसाब से कर दिए गए। 2014 में सीएजी की रिपोर्ट आई, जिसमें खुलासा हुआ कि 2007 से 2013 के बीच जमीन ट्रांसफर करने के मामले में गड़बड़ी हुई। सीएजी रिपोर्ट में दावा किया गया कि सरकार ने 25 हजार करोड़ के बजाय सिर्फ 76 करोड़ रुपये ही जमा कराए। जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच अब सीबीआई को सौंप दी थी।
नहीं उठा सके रोशनी एक्ट का लाभ
रोशनी एक्ट लागू होने से पहले लोगों के पास दस लाख कनाल सरकारी जमीन कब्जे में थी। एक्ट में यह प्रावधान था कि 1990 से पहले जिसके पास सरकारी जमीन का कब्जा था वे ही इसका लाभ उठा सकेंगे। वर्ष 2004 और 2007 में संशोधन हुआ और उसमें 1990 का प्रावधान हटा दिया गया था।
इस बीच नए कानून की सूचना लीक हो गई थी। जिससे कई लोगों ने खाली पड़ी जमीन पर भी कब्जा कर लिया। सरकारी जमीन पर कब्जे का आंकड़ा दस लाख कनाल से बीस लाख कनाल तक पहुंच गया। कब्जा करने वाले 547 लोगों में से भी अधिकतर लोग राजनेता और नौकरशाह हैं। पहले इनके नाम नहीं बताए गए थे। बीस लाख कनाल जमीन पर कब्जा होने से 25,500 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ और सरकार को घाटा हुआ।
इस घाटे का आकलन 2006 का है और 2014 में जमीनों के दाम काफी बढ़ गए हैं। हालांकि रोशनी एक्ट में नीलामी का भी प्रावधान था और सरकार ने राहत देकर कृषि योग्य जमीन को भी मुफ्त में अलाट कर दिया। इसकी रिपोर्ट अगर सही समय पर दी जाती तो सीएजी रिपोर्ट सितंबर, 2013 को सौंप देती। रिपोर्ट का इंतजार होता रहा और मार्च में बजट सत्र में रिपोर्ट पेश करनी पड़ी।