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कश्मीरी पंडितों पर फिल्म बनाएंगे विशाल!

Sun, 25 Jan 2015 06:46 PM IST
Updated Sun, 25 Jan 2015 06:46 PM IST
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kashmiri pandits' exile not a lesser tragedy: vishal bhardwaj

जयपुर साहित्य उत्सव में विशाल भारद्वाज ने अपनी चर्चित फिल्म 'हैदर' में सिर्फ एक पक्षीय हकीकत दिखाए जाने के आरोप का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे कश्मीरी पंडितों के निर्वासन की पीड़ा पर भी फिल्म बनाना चाहते हैं।

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लेकिन इसके लिए उन्होंने कोई समय सीमा या योजना नहीं बताई बल्कि कहा कि जब उनका मन कहेगा वह ज़रूर बनाएंगे। विशाल का कहना था कि कश्मीरी पंडितों की त्रासदी छोटी नहीं है लेकिन 'हैदर' में यह दिखाना संभव नहीं था।
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'हैदर' पर आधारित सत्र में खचाखच भरे पंडाल में यह सवाल छाया रहा कि उनकी फिल्म विलियम शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक 'हैमलेट' के कितनी करीब है और भारद्वाज इसके माध्यम से क्या वैसा ही सशक्त राजनीतिक संदेश देना चाह रहे थे?
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भारद्वाज के हिसाब से शायद संदेश से भी ज्यादा। एकतरफा फिल्म बनाने के आरोपों को दरकिनार करते हुए उन्होंने कहा कि वह 'सिर्फ कश्मीर की मानव त्रासदी' को रेखांकित करना चाहते थे।

'एक फिल्म निर्माता के रूप में हम इतने महत्वपूर्ण मुद्दे को कैसे अनदेखा कर सकते हैं?' सत्र में अधिकतर सवालों के जवाब फिल्म के सह-लेखक बशारत पीर ने दिए जो स्वयं कश्मीर से संबंध रखते हैं और उनकी पुस्तक में भी कश्मीर के दर्द को उकेरा गया है।

अच्छी कमाई

kashmiri pandits' exile not a lesser tragedy: vishal bhardwaj

फ‌िल्म में भारतीय सेना की बहुत अच्छी छवि नहीं दिखाने के सवाल पर पीर ने नाराजगी जाहिर की और कहा कि उन्होंने जो दिखाया वह नया नहीं है और बहुत बार अखबारों की सुर्ख‌ियों में रह चुका है।

उन्होंने कहा कि वह कश्मीरी पंडितों के दर्द को फ‌िल्म में थोड़ा सा दिखाकर खानापूर्ति नहीं करना चाहते थे।भारद्वाज ने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनकी फ‌िल्म सफल रही, सराही गई और ज़िन्दगी में पहली बार अच्छी आय भी हुई।

उन्होंने वर्ष 2000 में 'मिशन कश्मीर' फ‌िल्म बनाने वाले विधु विनोद चोपड़ा पर सवाल किया कि वे खुद कश्मीर से हैं फिर उन्होंने अब तक कश्मीरियों के दर्द पर फ‌िल्म नहीं बनाई। उनसे तो कोई सवाल नहीं पूछता और सिर्फ उन्हें ही दोषी ठहराया जा रहा है?

कहां से लाएं दूसरा फैज?

kashmiri pandits' exile not a lesser tragedy: vishal bhardwaj

जब सत्र में श्रोता के रूप में उपस्थित फैज अहमद फैज की बेटी ने पूछा कि आपने इस फ‌िल्म में फैज को ही क्यों चुना तो भारद्वाज का जवाब था, 'आज के नाम और आज के गम के नाम, गुलों में रंग भरे, बादे नौबहार चले।।। कहाँ से लिखा जाएगा? फैज होते तो पूरी फ‌िल्म भी वही लिखते और गाने भी। कहां से लाएं दूसरा फैज हम?'

प्रसिद्ध अभिनेता गिरीश कर्नाड को लगता है कि आख‌िरी 20 मिनट में कश्मीर फ‌िल्म से कहीं दूर चला जाता है और सिर्फ हैमलेट रह जाता है। उनके हिसाब से यही बात फ‌िल्म के अंत को कमजोर बनाती है।

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