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जब तक लोग न कहें कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं
ब्यूरो/बीबीसी, जम्मू
Updated Tue, 10 Mar 2015 07:21 PM IST
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हुर्रियत कांफ्रेस के वरिष्ठ नेता सैयद अली शाह गिलानी ने बातचीत में कहा है कि जम्मू-कश्मीर एक स्वायत्त क्षेत्र है और यह भारत का हिस्सा नहीं जब तक कि यहां के लोग यह फैसला नहीं कर लेते हैं। अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित से मुलाकात की है जिसपर एक बार फिर विवाद छिड़ गया है।
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पिछले साल इस तरह की ही एक मुलाकात के कारण भारत ने विदेश सचिव स्तर की बातचीत रद्द कर दी थी। सैयद अली शाह गिलानी कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर के बारे में लोगों को पता होना चाहिए कि कश्मीर में साढ़े सात-आठ लाख के करीब फौज हैं और एक लाख पुलिसकर्मी हैं और कश्मीर में वास्तव में इन्हीं लोगों का नियंत्रण है।
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उनका मानना है कि फौज की मौजूदगी और उसके वर्चस्व में जो हुकूमत बनती है वो इलाके में खास तब्दीली नहीं ला सकती क्योंकि हुकूमत बदलने से सिर्फ चेहरे बदलते हैं, सिस्टम नहीं बदलता। सैयद अली शाह गिलानी ने बातचीत में ये भी कहा कि कश्मीर में लोग अपने पैदाइशी हक के लिए लड़ रहे हैं और वहां कोई चरमपंथी नहीं है।
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उन्होंने कश्मीर से फौज को हटाकर लोगों को जनमत संग्रह का हक दिए जाने की मांग की है। गिलानी कहते हैं कि 1948 में जब भारत सरकार की ओर से कश्मीर का मसला संयुक्त राष्ट्र संघ में ले जाया गया तो वहां यह पारित हो चुका है कि कश्मीर के लोगों को जनमत संग्रह का हक दिया जाना चाहिए ताकि वो अपनी किस्मत का फैसला कर सकें।