कारगिल गाथा: भारतीय सेना ने दुश्मन के होश फाख्ता कर दिए
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कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन को मारने और खदेड़ने का सिलसिला पूरा हो चुका था, लेकिन अग्रिम चौकियों पर एहतियाती इंतजाम और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए सामरिक तैयारी को बड़े पैमाने पर अंजाम दिया गया।
अचानक सामने खड़ी हुई युद्ध की चुनौती ने शुरुआती चरण में तो हैरत में डाला था। भारतीय सेना जब संभली तो दुश्मन के होश फाख्ता हो गए थे। आपरेशन विजय के तहत त्वरित रूप से की गई जवाबी कार्रवाई तेरह जुलाई को भी जारी रखी गई।
एलओसी के इस पार भारतीय क्षेत्र की अग्रिम चौकियों तक 5 हजार टन गोला बारूद पहुंचाने का असंभव सा काम संभव कर दिखाया गया। यह सिलसिला 13 जुलाई को तेजी के साथ आगे बढ़ा।
युद्ध के दौरान दुश्मन का पहला टारगेट हाईवे था
युद्ध के दौरान दुश्मन का पहला टारगेट चूंकि हाईवे था। भीषण बमबारी होती रही, लेकिन असलहे सहित राशन, कपड़े, इंजीनियरिंग स्टोर विस्तार पहुंचाने में भारतीय सेना की विभिन्न यूनिटों ने पूरे अभियान के क्रम को धीमा नहीं पड़ने दिया।
कारगिल युद्ध में ज्यादातर चुनौतियां अचानक सामने आई थीं और उस पर जवाबी कार्रवाई में भारतीय सेना ने गजब का रिस्पांस दिया, जिससे दुश्मन के भी तमाम अनुमान धराशायी हो गए।
आज की घटना
तत्कालीन प्रधानमंत्री अटली बिहारी वाजपेयी ने कारगिल युद्ध के लिए चलाए गए आपरेशन विजय की सफलता की घोषणा 14 जुलाई, 1999 को की थी। अंतरराष्ट्रीय दबाव और भारतीय सेना के मुंहतोड़ जवाब से चित पाकिस्तान को बातचीत के लिए भारत की शर्तों को स्वीकार करना पड़ा था।