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जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट: भूमि अधिग्रहण पर फैसला सरकार का अधिकार क्षेत्र, जिला उपायुक्त का नहीं
Thu, 15 Dec 2022 02:03 AM IST
विमल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: विमल शर्मा
Updated Thu, 15 Dec 2022 02:03 AM IST
सार
न्यायाधीश संजीव कुमार और न्यायाधीश मोक्षा खजूरिया काजमी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही को रद्द कर दिया। याची पक्ष ने कहा कि रैनावाड़ी में इवेक्यूई प्रॉपर्टी कांप्लेक्स के परिसर को विस्तार देने के लिए उनकी जमीन को अधिग्रहित किया गया था।
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highcourt srinagar
- फोटो : फाइल
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विस्तार
ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के रैनावाड़ी में जिला उपायुक्त की ओर से चलाई जा रही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा, कौन सी भूमि सार्वजनिक उपयोग में लानी है, इस पर फैसला लेने का अधिकार क्षेत्र सरकार का है।
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यह फैसला जिला उपायुक्त अपने स्तर पर नहीं ले सकते। न्यायाधीश संजीव कुमार और न्यायाधीश मोक्षा खजूरिया काजमी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही को रद्द कर दिया। याची पक्ष की ओर से कहा गया कि रैनावाड़ी में उनकी 4 कनाल 5 मरला भूमि को इवेक्यूई प्रॉपर्टी कांप्लेक्स के परिसर को विस्तार देने के लिए अधिग्रहित कर लिया गया।
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कोर्ट में चुनौती देकर पीड़ित पक्ष ने कहा, भूमि अधिग्रहण में सार्वजनिक हित नहीं है। एक परिसर को विस्तार देने के लिए जिला उपायुक्त ने अपने स्तर पर ही आदेश जारी कर दिया, जबकि संबंधित अधिनियम की धारा 4(1) के तहत अधिसूचना भी जारी नहीं की गई।
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अधिनियम की धारा 1, 2, 3 और 4 में स्पष्ट है कि सार्वजनिक उपयोग के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में सार्वजनिक रूप से नोटिस दिया जाता है। बाकायदा मुनादी करने और सबसे ज्यादा सर्कुलेशन वाले दो अखबारों में अधिसूचना जारी करनी जरूरी है।
इसके ठीक विपरीत जिला उपायुक्त ने कोई अधिसूचना जारी नहीं की। कोर्ट ने दलीलों को सुनने के बाद कहा, जो शक्तियां सरकार के पास हैं, जिला उपायुक्त अपने स्तर पर ऐसी शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकते।
लिहाजा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को रद्द किया जाता है, हालांकि सरकार यदि इस भूमि का अधिग्रहण करना चाहती है तो अदालत का यह आदेश उस प्रक्रिया के आड़े नहीं आएगा।