जम्मू कश्मीर में आनलाइन खरीदारी को टैक्स के दायरे में लाने की तैयारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ई-कामर्स के बढ़ते चलन को देखते हुए राज्य सरकार ने आनलाइन खरीदे जा रहे उत्पादों पर टैक्स लगाने के लिए विधानसभा में बिल पेश किया। वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू ने जम्मू एंड कश्मीर एंट्री टैक्स आन गुड्स (अमेंडमेंट) बिल सोमवार को विधानसभा में पेश किया। सरकार की ओर से इस बिल को पेश करने का मकसद कारोबार के बदलते तरीकों को टैक्स के दायरे में लाना है।
संशोधन बिल पेश करते हुए वित्त मंत्री ने तर्क दिया कि कारोबार के तौर तरीकों में बदलाव हो रहा है। एंट्री टैक्स आन गुड्स एक्ट, 2000 की धारा तीन के तहत बाहर से राज्य में दाखिल होने वाली उन्हीं वस्तुओं पर टैक्स लागू है जिनका मूल्य 5 हजार रुपये से अधिक है।
आनलाइन खरीदारी के लगातार खुल रहे नए-नए विकल्पों को लोग अपना रहे हैं। ऐसे में आनलाइन पोर्टल से उत्पादों का चयन किया जा रहा है और उसकी डिलिवरी राज्य में हो रही है। मंत्री ने कहा कि माइनर चेक पोस्ट से लिए गए आंकड़े राज्य को राजस्व घाटे की ओर इशारा करते हैं।
जानिए क्यों लगाया जा रहा है टैक्स
उन्होंने जम्मू रेलवे स्टेशन पर स्थित माइनर चेक पोस्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि 5 हजार से कम मूल्य दर्शाने वाले उत्पादों की प्रति दिन की बिलिंग 15 से 18 लाख रुपये है। उत्पादों की सीधी खरीद के इस क्रम से स्थानीय व्यापारियों और राज्य को आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्हाेंने कहा कई व्यापारी उनसे इसकी शिकायत कर चुके हैं।
आनलाइन खरीदारी की प्रक्रिया में टैक्स बचाने के लिए भी कई तरह के तिकड़म़ की प्रबल आशंका है। कहा कि यदि कोई उपभोक्ता 20 हजार रुपये की आनलाइन खरीदारी करता है तो टैक्स से बचने के लिए पोर्टल कंपनियां ग्राहक को अलग-अलग कंसाइनमेंट के माध्यम से उत्पाद पहुंचाती हैं।
20 हजार की खरीदारी को यदि चार कंसाइनमेंट में बदल दिया जाए तो यह शुल्क 5 हजार रुपये प्रति उत्पाद हो जाता है, जबकि यह सीमा कर के दायरे में नहीं आती। द्राबू ने कहा यदि प्रतिदिन 15 लाख रुपये के कारोबार को टैक्स के दायरे में लाया जाए तो राज्य को रोजाना एक लाख रुपये की आय होगी जो महीने में 30 लाख रुपये और वर्ष में 3.50 करोड़ रुपये तक बैठती है।