फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   JK govt introduces bill seeking entry tax on online shopping

जम्मू कश्मीर में आनलाइन खरीदारी को टैक्स के दायरे में लाने की तैयारी

Tue, 21 Jun 2016 01:42 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Tue, 21 Jun 2016 01:42 PM IST
विज्ञापन
JK govt introduces bill seeking entry tax on online shopping

ई-कामर्स के बढ़ते चलन को देखते हुए राज्य सरकार ने आनलाइन खरीदे जा रहे उत्पादों पर टैक्स लगाने के लिए विधानसभा में बिल पेश किया। वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू ने जम्मू एंड कश्मीर एंट्री टैक्स आन गुड्स (अमेंडमेंट) बिल सोमवार को विधानसभा में पेश किया। सरकार की ओर से इस बिल को पेश करने का मकसद कारोबार के बदलते तरीकों को टैक्स के दायरे में लाना है।

विज्ञापन


 संशोधन बिल पेश करते हुए वित्त मंत्री ने तर्क दिया कि कारोबार के तौर तरीकों में बदलाव हो रहा है।  एंट्री टैक्स आन गुड्स एक्ट, 2000 की धारा तीन के तहत बाहर से राज्य में दाखिल होने वाली उन्हीं वस्तुओं पर टैक्स लागू है जिनका मूल्य 5 हजार रुपये से अधिक है। 
विज्ञापन


आनलाइन खरीदारी के लगातार खुल रहे नए-नए विकल्पों को लोग अपना रहे हैं। ऐसे में आनलाइन पोर्टल से उत्पादों का चयन किया जा रहा है और उसकी डिलिवरी राज्य में हो रही है। मंत्री ने कहा कि माइनर चेक पोस्ट से लिए गए आंकड़े राज्य को राजस्व घाटे की ओर इशारा करते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

जानिए क्यों लगाया जा रहा है टैक्स

JK govt introduces bill seeking entry tax on online shopping

उन्होंने जम्मू रेलवे स्टेशन पर स्थित माइनर चेक पोस्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि 5 हजार से कम मूल्य दर्शाने वाले उत्पादों की प्रति दिन की बिलिंग 15 से 18 लाख रुपये है। उत्पादों की सीधी खरीद के इस क्रम से स्थानीय व्यापारियों और राज्य को आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्हाेंने कहा कई व्यापारी उनसे इसकी शिकायत कर चुके हैं। 

आनलाइन खरीदारी की प्रक्रिया में टैक्स बचाने के लिए भी कई तरह के तिकड़म़ की प्रबल आशंका है। कहा कि यदि कोई उपभोक्ता 20 हजार रुपये की आनलाइन खरीदारी करता है तो टैक्स से बचने के लिए पोर्टल कंपनियां ग्राहक को अलग-अलग कंसाइनमेंट के माध्यम से उत्पाद पहुंचाती हैं। 

20 हजार की खरीदारी को यदि चार कंसाइनमेंट में बदल दिया जाए तो यह शुल्क 5 हजार रुपये प्रति उत्पाद हो जाता है, जबकि यह सीमा कर के दायरे में नहीं आती। द्राबू ने कहा यदि प्रतिदिन 15 लाख रुपये के कारोबार को टैक्स के दायरे में लाया जाए तो राज्य को रोजाना एक लाख रुपये की आय होगी जो महीने में 30 लाख रुपये और वर्ष में 3.50 करोड़ रुपये तक बैठती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed