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सात लोगों को बेची गई जमीन की रजिस्ट्री रद्द
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Thu, 12 Feb 2015 11:37 AM IST
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सरकार द्वारा एलाट की गई जमीन में उठे विवाद के बाद वित्तीय आयुक्त राजस्व की अदालत ने सात लोगों के नाम वाली जमीन का पंजीकरण रद्द कर दिया। साथ ही डिप्टी कमिश्नर को तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर मामले की जांच करने को कहा है। जांच रिपोर्ट 27 अप्रैल, 2015 तक पेश करने को कहा है। आरोप है कि उक्त जमीन फर्जी दस्तावेजों के साथ कई हाथों में बिकी।
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वित्तीय आयुक्त राजस्व अरुण कुमार के अनुसार राजस्व विभाग के रिकार्ड का विश्लेषण करने से स्पष्ट हुआ है कि कृष्णा बंती नामक महिला को कानून के विभिन्न पैमाने पर भूमि के स्वामित्व का अधिकार या फिर ऑक्यूपेंसी टेनेंसी राइट के तहत दिया गया। वित्तीय आयुक्त के अनुसार विस्थापित व्यक्तियों को भूमि आवंटन के मामले में कानून के अनुसार कुछ सीमा तय है, लेकिन इस मामले में तय सीमा से जमीन पार हो चुकी है।
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मामले की तह तक जाने और जिम्मेदारी तय करने के लिए विस्तृत जांच की जरूरत है। मोहल्ला प्रताप गंज निवासी विपन अग्रवाल और उनके भाई मनोज अग्रवाल और ललित मोहन अग्रवाल ने वित्तीय आयुक्त की अदालत में याचिका दायर करते हुए बताया कि गांव डिली में दो कनाल 19 मरला जमीन (खसरा नंबर 694) विवादित है।
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उन्होंने कहा कि उक्त जमीन 14 जनवरी, 1982 को उनके पिता के नाम एलाट हुई थी, जिसका विवरण राजस्व रिकार्ड में भी है। 25 फरवरी 1995 को जम्मू के तहसीलदार (सेटेलमेंट) ने 33 कनाल 16 मरला जमीन के एलाटमेंट के सरकारी आदेश को रद्द कर दिया। याचिकाकर्ता के अनुसार उनकी जमीन को विस्थापित दीप्ती राम की पत्नी कृष्णा बंती के नाम कर दिया गया।
यह मामला भ्रष्टाचार निरोधक विशेष जज की अदालत में भी पहुंचा था। विजिलेंस ने इस मामले की जांच के बाद संबंधित तहसीलदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा भी की। याचिकाकर्ता के अनुसार इस संबंध में 26 जनवरी, 2014 को अखबारों के माध्यम से पांच प्रतिवादियों कृष्णा बंती, बंसी लाल, शिव राम, हफीज बानो और रमन बंगोत्रा को नोटिस भी जारी किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आने पर उन्हें दो फरवरी 2014 को एक्स पार्टी माना गया।
अदालत ने याचिकाकर्ता और प्रतिवादी भूपिंदर सिंह और जगजीत सिंह के लिखित पक्ष पर गौर किया। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि प्रतिवादी कृष्णा बंती के नाम पर जम्मू के बरनाई, पलौड़ा, मुट्ठी, गांव डिली में कई जमीनें हैं।
इनमें से कई जमीनें अन्य लोगों को भी बेची गईं। वित्तीय आयुक्त ने अपने आदेश में कहा कि राजस्व अधिकारी रद्द की गई जमीनों के संबंध में किसी तरह के जमीन परिवर्तन के प्रमाण जारी नहीं करेंगे। डीसी तीन अनुभवी सदस्यों की कमेटी का गठन कर मामले की जांच करवाएं और दो माह के अंदर रिपोर्ट पेश करें। जांच कमेटी को डीसी हर तरह से मदद करें।