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बिना दवाईयों का सुपर स्पेशलिटी अस्पताल

Sat, 14 Feb 2015 12:29 PM IST
Updated Sat, 14 Feb 2015 12:29 PM IST
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jammu super speciality hospital running short of medicines

एम्स की तर्ज पर रेशमघर स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से बुनियादी सुविधाएं गायब हैं। न कैंटीन, न दवाइयों की दुकानें और न ही इंटरकाम फोन की सुविधा। यहां तक की सुविधाओं के लिए मरीजों के साथ स्टाफ को इंतजार करना पड़ रहा है। पीपीपी मोड के तहत कुछ नए निर्माण के लिए पिछले साल अस्पताल में पहले से ही बेसमेंट में निर्माणाधीन कैंटीन ढांचे को तोड़ दिया गया था।

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इसके बाद कैंटीन को लेकर कुछ खास नहीं हो पाया है। अस्पताल में नेफरोलाजी, यूरोलाजी, सीटीवीएस, कार्डियोलाजी, न्यूरोसर्जरी, गेस्ट्रोलाजी यूनिट में ओपीडी के अलावा मरीजों को इंडोर वार्ड में इलाज दिया जा रहा है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं न होने से स्टाफ के साथ मरीजों और तीमारदारों की दिक्कतें बढ़ गई हैं।
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वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का उद्घाटन किया था। इस प्रोजेक्ट को सीपीडब्ल्यूडी (सेंटर पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट) विभाग ने 17 फरवरी 2008 को शुरू किया था, लेकिन 18 माह में पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट को 2013 में करीब 64 महीनों बाद चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा सका।

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डाक्टरों से संपर्क करने में परेशानी

jammu super speciality hospital running short of medicines

अस्पताल के शुरू होने के महीनों बाद भी बुनियादी सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई जा सकी हैं। अस्पताल में कैंटीन सुविधा न होने से खासकर रात में ठहरने वाले मरीजों और तीमारदारों को जरूरी सामान के लिए महेशपुरा चौक या जीएमसी की कैंटीन में जाना पड़ रहा है। एसोसिएटेड अस्पतालों में सीडी अस्पताल में भी कैंटीन सुविधा न होने से मरीजों की दिक्कतें बरकरार हैं।

तीमारदारों को छोटी सी चीज के लिए भी बाहर आना पड़ता है। इसी तरह सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में विभिन्न वार्डों में मरीजों को भर्ती करने के साथ ओपीडी चल रही है। अस्पताल में कोई भी दवाई की दुकान न होने से मरीजों को जीएमसी के बाहर दुकानों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

लेकिन वहां तक का सफर काफी लंबा है। अस्पताल के भीतर कहीं भी इंटरकाम टेलीफोन की सुविधा शुरू नहीं है। इंटरकाम सुविधा न होने से डाक्टरों को भी संपर्क करने में परेशानी आ रही है।

कैंटीन के लिए सरकार को लिखा गया है। दवाइयों की दुकानों पर फिलहाल कुछ नहीं हो पाया है। इंटरकाम टेलीफोन सुविधा के लिए रिपेयर कमेटी को लिखा गया है। अलबत्ता मरीजों को सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं।
डाक्टर रोमेश गुप्ता, अधीक्षक सुपर स्पेशलिटी

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