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J&K: मेयर बनाने में निर्दलीय पार्षद बनते रहे किंग मेकर, दो बार कांग्रेस तो तीन बार भाजपा के बने मेयर

Mon, 01 Oct 2018 12:14 AM IST
संजीव दुबे, जम्मू
संजीव दुबे, जम्मू Updated Mon, 01 Oct 2018 12:14 AM IST
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jammu municipal elections individual candidates are always the mayor chooser in past elections
- फोटो : Demo Pic
13 साल पहले 2005 में हुए नगर निगम जम्मू के चुनाव में किसी भी दल को बहुमत न मिलने के चलते निर्दलीय पार्षद पांच साल तक किंग मेकर बने रहे। कभी वह भाजपा का मेयर चुनने में भूमिका निभाते रहे तो कभी कांग्रेस का मेयर चुनने में। इसी कारण नगर निगम जम्मू में तीन बार भाजपा का मेयर रहा था और दो बार कांग्रेस का।
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कुल 71 वार्डों के नगर निगम में से कोई भी दल बहुमत के 36 के आंकड़े को छू नहीं पाया था। कांग्रेस को सबसे ज्यादा 27 सीटें मिली थीं। भाजपा को 25, नेशनल कांफ्रेंस को छह, पीडीपी को दो, शिव सेना को एक और नौ निर्दलीय चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे।
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कांग्रेस और पीडीपी के गठबंधन से पार्षदों की संख्या 29 हो गई थी और बहुमत हासिल करने के लिए उन्हें निर्दलीय कारपोरेटरों का सहारा लेना पड़ा था। इस कारण मेयर चुनाव में निर्दलीय कारपोरेटरों के खरीद फरोख्त के आरोप भी लगते रहे थे। वहीं भाजपा के 25 और एक शिव सेना कारपोरेटरों को मिलाकर इस गठबंधन के पास संख्या 26 थी और उसे भी तीन बार निर्दलीय कारपोरेटरों का सहारा लेना पड़ा।
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नेकां पार्षदों के समर्थन से कवींद्र बनते रहे मेयर
नगर निगम चुनाव में त्रिशंकु  नगर निगम के चलते वैचारिक मतभेदों के बावजूद भाजपा ने मेयर चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस का समर्थन हासिल किया। भाजपा कारपोरेटर कवींद्र गुप्ता तीन बार मेयर की कुर्सी तक नेशनल कांफ्रेंस के कारपोरेटरों के समर्थन की बदौलत पहुंचे। नेकां के छह कारपोरेटर होने की वजह से इस पार्टी के धर्मवीर जमवाल कई साल तक डिप्टी मेयर की कुर्सी पर रहे।

इस बार भी बड़ी संख्या में निर्दलीय मैदान में

पिछले चुनाव में निर्दलीय कारपोरेटर की रही बल्ले-बल्ले को देखते हुए इस बार भी बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर आए है। आलम तो यह है कि दलीय उम्मीदवारों से कहीं ज्यादा संख्या निर्दलीय उम्मीदवारों की है। इनमें टिकट न मिलने पर भाजपा और कांग्रेस के भी कई बागी नेता निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।
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