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जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में स्थानीय युवा अपना रहे आतंक की राह, इस साल 131 बने आतंकी
एजेंसी, श्रीनगर
Updated Mon, 27 Aug 2018 01:18 AM IST
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Jammu-Kashmir
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जम्मू-कश्मीर में एक ओर सुरक्षा बल के जवान जहां आतंकवाद के खात्मे के लिए संघर्ष कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर इस मोर्चे पर कई खतरनाक स्थितियां भी उभरकर सामने आ रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, साल 2010 के बाद से इस साल 31 जुलाई तक 131 स्थानीय युवा विभिन्न आतंकी संगठनों में शामिल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि अधिकतर युवा अलकायदा से वैचारिक जुड़ाव रखने वाले संगठनों से जुड़े हैं।
पिछले साल 126 स्थानीय युवा इन संगठनों से जुड़े थे। शोपियां जिले में सबसे अधिक 35 युवा आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए हैं। कई युवा अंसार गजवत-उल-हिंद में शामिल हो रहे हैं। यह समूह अलकायदा के समर्थन की बात कहता है। इसका नेतृत्व जाकिर रशीद भट उर्फ जाकिर मूसा करता है। वह त्राल क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला है।
अधिकारियों की मानें तो इस समूह की स्वीकार्यता में इजाफा हो रहा है क्योंकि मूसा एकमात्र ऐसा आतंकी है जिसने हुर्रियत कान्फ्रेंस के अलगाववादियों का दबदबा खत्म करने का काम किया है। उसने कश्मीर को राजनीतिक मसला बताने पर सर कलम करने की धमकी दी है।
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कश्मीर घाटी में सुरक्षा स्थिति पर नजर रखने वाले अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा वक्त में मूसा के नारे ‘शरीयत या शहादत’ ने पाकिस्तान के समर्थन वाले वर्षों पुराने नारे की जगह ले ली है।
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पिछले साल 126 स्थानीय युवा इन संगठनों से जुड़े थे। शोपियां जिले में सबसे अधिक 35 युवा आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए हैं। कई युवा अंसार गजवत-उल-हिंद में शामिल हो रहे हैं। यह समूह अलकायदा के समर्थन की बात कहता है। इसका नेतृत्व जाकिर रशीद भट उर्फ जाकिर मूसा करता है। वह त्राल क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला है।
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अधिकारियों की मानें तो इस समूह की स्वीकार्यता में इजाफा हो रहा है क्योंकि मूसा एकमात्र ऐसा आतंकी है जिसने हुर्रियत कान्फ्रेंस के अलगाववादियों का दबदबा खत्म करने का काम किया है। उसने कश्मीर को राजनीतिक मसला बताने पर सर कलम करने की धमकी दी है।
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कश्मीर घाटी में सुरक्षा स्थिति पर नजर रखने वाले अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा वक्त में मूसा के नारे ‘शरीयत या शहादत’ ने पाकिस्तान के समर्थन वाले वर्षों पुराने नारे की जगह ले ली है।
वर्ष 2014 के बाद हथियार उठाने वालों की बढ़ती गई संख्या
संसद और राज्य की विधानसभा में पेश हाल के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2010 के बाद इस साल आतंकी संगठन में शामिल होने वालों का आंकड़ा शीर्ष पर है। वर्ष 2014 के बाद घाटी में हथियार उठाने वाले नौजवानों की संख्या क्रमश: बढ़ती गई है। वर्ष 2010 से 2013 तक यह आंकड़ा क्रमश: 54, 23, 21 और 06 था। वर्ष 2014 में यह आंकड़ा बढ़कर 53 हुआ। साल 2015 में 66 जबकि 2016 में 88 युवाओं ने आतंकवाद का दामन थामा है।
बुरहान वानी की मौत के बाद युवाओं को बरगला रहा मूसा
हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद अब जाकिर मूसा (24) युवाओं को बरगला रहा है। मूसा मुख्य रूप से अपने संगठन में युवाओं की भर्ती पर ध्यान दे रहा है। वह नौजवानों को हथियार उठाने के लिए उकसा रहा है। ऐसा माना जाता है कि मूसा यमन-अमेरिकी मूल के आतंकी अनवार अल अवलाकी से प्रभावित है जो सितंबर 2011 में अफगानिस्तान में मारा गया था। बता दें कि अलकायदा में भर्तियों के लिए भी अवलाकी ने बड़ी भूमिका निभाई थी।
आईएस के प्रति घटा आकर्षण
आतंकी संगठन आईएसआईएस से संबद्ध आईएसजेके को लेकर पहले युवाओं में आकर्षण था लेकिन इसके प्रमुख दाऊद सोफी के मारे जाने के बाद अब इस संगठन का कोई नामलेवा नहीं बचा है। अधिकारियों के मुताबिक, शोपियां, पुलवामा, अनंतनाग, कुलगाम और अवंतीपुरा जिलों वाले सबसे अशांत दक्षिण कश्मीर से सर्वाधिक युवा आतंकी संगठनों में शामिल हो रहे हैं। कश्मीर घाटी के इन पांच जिलों से 100 से ज्यादा युवा आतंकी संगठनों में शामिल हुए हैं।