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उमर बोले फैक्स मशीन ने घोंटा लोकतंत्र का गला, राज्यपाल ने कहा: फैक्स आता तो भी कर देता विधानसभा भंग
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Thu, 22 Nov 2018 01:51 PM IST
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उमर अब्दुल्ला
- फोटो : फाइल
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जम्मू कश्मीर में विधानसभा भंग होने के बाद से राजनैतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इसमें पीडीपी, कांग्रेस, एनसी सहित देश की विभिन्न पार्टियों ने जहां एक तरफ विरोध शुरू कर दिया है। वहीं राज्यपाल सत्यपाल मालिक ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि मैंने किसी के साथ पक्षपात नहीं किया है। मेरा फैसला जम्मू-कश्मीर की आवाम के पक्ष में है।
राज्यपालप सत्यपाल मलिक ने कहा, ''मैं प्रदेश में टूट-फूट से, खरीद-फरोख्त से या दवाब से कोई सरकार बनेगी मैं उसके पक्ष में नहीं हूं। मैं इसके बदले चाहूंगा कि चुनाव हो, चुनी हुई सरकार आए और वो प्रदेश को चलाए। पिछले 15 दिन से मुझे शिकायकतें आ रही थीं कि खरीद-फरोख्त हो रही है, विधायकों को डराया धमकाया जा रहा है। महबूबा जी से खुद मुझ से इस बात की शिकायत की थी कि मेरे विधायकों को डराया जा रहा है। दूसरे पक्ष के लोगों ने कहा था कि बड़े पैमाने पर रुपया बांटने की तैयारी चल रही है।''
राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा, ''ये सारी चीजें जानते हुए मैं ये नहीं कर सकता था कि किसी को सरकार बनाने का मौका दे दूं और फिर वो बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त हो और फिर प्रदेश अस्थिर हो जाए। कुछ ताकतें हैं जो लोकतंत्र नहीं चाहतीं। इन ताकतों को जब लगा कि चीजें हमारे हाथ से निकल रही हैं तो अपवित्र गठबंधन करके मेरे सामने आ गए। मैंने किसी के साथ पक्षपात नहीं किया, दूसरे पक्ष को भी नहीं सुना। मैंने जम्मू कश्मीर की जनता के पक्ष में काम किया है।''
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राज्यपालप सत्यपाल मलिक ने कहा, ''मैं प्रदेश में टूट-फूट से, खरीद-फरोख्त से या दवाब से कोई सरकार बनेगी मैं उसके पक्ष में नहीं हूं। मैं इसके बदले चाहूंगा कि चुनाव हो, चुनी हुई सरकार आए और वो प्रदेश को चलाए। पिछले 15 दिन से मुझे शिकायकतें आ रही थीं कि खरीद-फरोख्त हो रही है, विधायकों को डराया धमकाया जा रहा है। महबूबा जी से खुद मुझ से इस बात की शिकायत की थी कि मेरे विधायकों को डराया जा रहा है। दूसरे पक्ष के लोगों ने कहा था कि बड़े पैमाने पर रुपया बांटने की तैयारी चल रही है।''
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राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा, ''ये सारी चीजें जानते हुए मैं ये नहीं कर सकता था कि किसी को सरकार बनाने का मौका दे दूं और फिर वो बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त हो और फिर प्रदेश अस्थिर हो जाए। कुछ ताकतें हैं जो लोकतंत्र नहीं चाहतीं। इन ताकतों को जब लगा कि चीजें हमारे हाथ से निकल रही हैं तो अपवित्र गठबंधन करके मेरे सामने आ गए। मैंने किसी के साथ पक्षपात नहीं किया, दूसरे पक्ष को भी नहीं सुना। मैंने जम्मू कश्मीर की जनता के पक्ष में काम किया है।''
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