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घाटी में निर्दोषों की हत्याओं पर मानवाधिकार कार्यकर्ता और मीडिया का एक तबका मौन
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श्रीनगर। चिनार कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे ने यहां आयोजित गोष्ठी में स्थानीय से लेकर अतंरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों और मीडिया के एक तबके पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ये लोग कश्मीर घाटी में हाल ही में निर्दोष नागरिकों की आतंकियों द्वारा की गई हत्याओं पर मौन हैं।
बीबी कैंट में पिछले 30 वर्षों में आतंकवादियों द्वारा मानवाधिकारों का उल्लंघन और कश्मीरी नागरिकों पर उसका प्रभाव विषय पर आयोजित पांच दिवसीय
सेमिनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए जीओसी पांडे ने कहा कि मानवाधिकारों के उच्च मानकों को बनाए रखने की जिम्मेदारी और जवाबदेही स्टेट की है, परंतु यह एक स्वीकार्य तथ्य है कि संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा कारणों से मानवाधिकारों में कटौती की जाती है। जबकि आतंकी संगठन आम जनता हथियारों की धमक दिखाकर अपना वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश के हैं। लोगों को धमकाना, हत्याएं, शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करना और अभिव्यक्ति को दबाना मानवाधिकारो का उल्लंघन है। उन्होंने वहां मौजूद लोगों का आह्वान किया कि वह आर्थिक गतिविधियों, शिक्षा, मनोरंजन और स्वतंत्रता के बुनियादी अधिकारों से वंचित करने के लिए पाकिस्तान के मददगारों पर सवाल उठाएं और उन्हें जिम्मेदार ठहराएं।
एआरटीआरएसी के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला ने समाज से कथित अलगाव की भावना को उलटने और एक बहुसांस्कृतिक और समावेशी समाज को बढ़ावा देने के लिए कहा। लोगों से एकजुट होकर खड़े होने और उन लोगों के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए कहा जो पाकिस्तानी सहयोग से कश्मीरी लोगों को बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित करता है। संगोष्ठी में स्थानीय तथा दूसरे प्रदेशों के विषय विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
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बीबी कैंट में पिछले 30 वर्षों में आतंकवादियों द्वारा मानवाधिकारों का उल्लंघन और कश्मीरी नागरिकों पर उसका प्रभाव विषय पर आयोजित पांच दिवसीय
सेमिनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए जीओसी पांडे ने कहा कि मानवाधिकारों के उच्च मानकों को बनाए रखने की जिम्मेदारी और जवाबदेही स्टेट की है, परंतु यह एक स्वीकार्य तथ्य है कि संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा कारणों से मानवाधिकारों में कटौती की जाती है। जबकि आतंकी संगठन आम जनता हथियारों की धमक दिखाकर अपना वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश के हैं। लोगों को धमकाना, हत्याएं, शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करना और अभिव्यक्ति को दबाना मानवाधिकारो का उल्लंघन है। उन्होंने वहां मौजूद लोगों का आह्वान किया कि वह आर्थिक गतिविधियों, शिक्षा, मनोरंजन और स्वतंत्रता के बुनियादी अधिकारों से वंचित करने के लिए पाकिस्तान के मददगारों पर सवाल उठाएं और उन्हें जिम्मेदार ठहराएं।
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एआरटीआरएसी के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला ने समाज से कथित अलगाव की भावना को उलटने और एक बहुसांस्कृतिक और समावेशी समाज को बढ़ावा देने के लिए कहा। लोगों से एकजुट होकर खड़े होने और उन लोगों के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए कहा जो पाकिस्तानी सहयोग से कश्मीरी लोगों को बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित करता है। संगोष्ठी में स्थानीय तथा दूसरे प्रदेशों के विषय विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
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