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कश्मीर: यूएपीए में छात्रों की गिरफ्तारी का मुद्दा गर्माया, पुलिस ने कहा- आतंकियों की शह पर हुई नारेबाजी

Wed, 29 Nov 2023 01:12 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Wed, 29 Nov 2023 01:12 PM IST
सार

पुलिस ने कहा कि उन्होंने आतंकवाद विरोधी कानून का नरम प्रावधान लागू किया है। पुलिस ने कहा कि एफआईआर एक लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है और शिकायत की सामग्री के अनुसार धाराएं लगाई गईं थीं।

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Jammu Kashmir: Politicians question on arrest of seven Kashmiri students police issued statement
उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

भारत विरोधी नारे लगाने और विश्व कप हार का जश्न मनाने के मामले में यूएपीए के तहत गिरफ्तार सात छात्रों के मामले का घाटी में राजनीतिकरण शुरू हो गया है। नेशनल कान्फेंस और पीडीपी की तरफ से मुद्दे को उछालने के बाद गांदरबल जिला पुलिस ने कहा कि शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी आफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (स्कास्ट) कैंपस के गिरफ्तार छात्रों ने भारत विरोधी नारे लगाए थे। 

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पुलिस ने कहा कि यह घटना महज पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने के बारे में नहीं थी। ये नारे, उन छात्रों को डराने के लिए भी थे, जो अलगाववाद की विचारधारा को नहीं मानते। यह घटना अलगाववादियों और आतंकवादियों की शह पर हुई है। पुलिस ने कहा कि इसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसा कुछ नहीं था बल्कि ये दूसरों को आतंकित करने के बारे में थे। ये नारे भारत समर्थक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले और पाकिस्तान विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देने वाले थे। पुलिस के पास सबूत के लिए लिखित शिकायतें थीं। 
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सब आरोपियों के खिलाफ एफआईआर लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज की गई और शिकायत की सामग्री के अनुसार ही धाराएं लगाई गईं। छात्रों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम की धारा 13 के तहत मामला दर्ज किया गया है। अधिनियम के अन्य प्रावधानों के मुकाबले यह धारा नरम है। धारा 13 किसी भी गैरकानूनी गतिविधि को उकसाने या सलाह देने से संबंधित है और सात साल जेल की सजा का प्रावधान है।
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न मैं छात्रों की नारेबाजी से सहमत और न पुलिस की कार्रवाई सेः उमर

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला समेत कई राजनेताओं ने कहा कि पुलिस की इस कार्रवाई से युवाओं पर बुरा असर पड़ेगा। अब्दुल्ला ने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जम्मू-कश्मीर के साथ दिल की दूरी को खत्म करने के आश्वासन के खिलाफ है। इन छात्रों ने जो किया उससे मैं सहमत नहीं हूं लेकिन पुलिस ने जिस तरह से इस मामले को संभाला, मैं उससे भी सहमत नहीं हूं। इससे प्रधानमंत्री की परिकल्पना के अनुसार ''दिल की दूरी'' कम नहीं होगी। 

पुलिस को याद रखना चाहिए कि यह नरम धारा भी छात्रों के करियर को बर्बाद करके रख देगी। महबूबा मुफ्ती ने युवाओं की गिरफ्तारी को चौंकाने वाला बताया और कहा कि आतंकवादियों पर लगाई जाने वाली यूएपीए का इस्तेमाल छात्रों पर किया जाने लगा है। वरिष्ठ सीपीआई (एम) नेता एम वाई तारिगामी ने छात्रों की नारेबाजी को महज जश्न मनाने की कार्रवाई बताया। तारिगामी ने कहा कि इस घटना का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।


स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने उपराज्यपाल से यूएपीए हटाने का किया आग्रह

जेके स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने यूएपीए के तहत गिरफ्तार छात्रों के मामले में नरमी बरतने की अपील की है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मानवीय आधार पर दया की मांग करते हुए छात्रों के खिलाफ लगाए गए यूएपीए आरोपों को हटाने का आग्रह किया है। यूनियन ने कहा कि यह सजा छात्रों का भविष्य बर्बाद कर सकती है। यूएपीए के तहत कार्रवाई का छात्रों के करियर सहित उनके जीवन को तबाह कर देगी।

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