जम्मू-कश्मीर में पेशावर जैसे हमले की धमकी
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रियासत में पेशावर की तर्ज पर हमले की आशंका के बाद सेना ने आर्मी स्कूलों की सुरक्षा बढ़ी दी है। सेना शिविरों के केंद्रीय विद्यालयों में भी जवानों की तैनाती बढ़ाई गई है।
बार्डर और भारत-पाक नियंत्रण रेखा पर स्थित आर्मी कैंपों की सुरक्षा के लिए अलर्ट जारी किया गया है। जम्मू कश्मीर स्थित आर्मी स्कूल पहले से आतंकियों के निशाने पर हैं।
लश्कर-ए- तैयबा के फिदायीन दस्ते एक साल में तीन बार स्कूलों को निशाना बनाने की कोशिश कर चुके हैं। विधानसभा में खल डालने की कोशिशें विफल होने के बाद आतंकी संगठनों की बौखलाहट बढ़ी है।
कश्मीर घाटी में भारी मतदान के बाद आतंकी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए बड़े हमले की साजिश बुन रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के इस आशय के इनपुट के बाद बार्डर और एलओसी पर गश्त भी बढ़ाई गई है।
1600 आतंकी बैठें है तैयार
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों को भी अलर्ट किया है। जम्मू कश्मीर में अंतिम चरण का चुनाव 20 दिसंबर को होना है।
इन चरण के चुनाव में जम्मू के अलावा राजोरी, पुंछ और कठुआ इलाके की सीटों पर मतदान होना है जो बार्डर और एलओसी के पास हैं।
इन इलाकों में आतंकियों द्वारा लगातार घुसपैठ की कोशिशें होती रहीं हैं। सीमा पार पाकिस्तान के क्षेत्र में आतंकी संगठनों के 42 कैंप हैं जिनमें 1600 प्रशिक्षित आतंकी हैं।
लश्कर-ए तैयबा ने शोहदा बिग्रेड और अल नसरीन नामक दो नए संगठन बनाए हैं। इन नए संगठनों में तालिबानी भी शामिल हैं।
पिछले एक साल से हर फिदायीन हमले में इन दोनों नए आतंकी संगठनों का हाथ प्रमाणित हुआ है। लिहाजा सेना ने तलाशी अभियान तेज कर दिया है। सीमा पर हो रही हर हलचल पर नजर रखी जा रही है।
आर्मी कैंप पर हो चुका है हमला
सैन्य सूत्रों के मुताबिक जम्मू कश्मीर में काफी संख्या में सेना के स्कूल हैं और कई शिविरों में केंद्रीय विद्यालय भी सेना की देखरेख में चलते हैं।
सभी स्कूलों की सुरक्षा के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था पर अमल हो रहा है। गौरतलब है कि आतंकियों ने इससे पहले इस साल मार्च में कठुआ जिले के जंगलोट स्थित आर्मी कैंप फिदायीन हमला किया था।
पिछले साल सांबा के पास सैन्य शिविर में भी फिदायीन हमला हुआ था। दोनों कैंपों में हमले के स्थान के पास ही आर्मी स्कूल थे।
मारे गए पाकिस्तानी आतंकियों के पास से आधुनिक हथियारों और एक पखवारे तक के लिए सूखा राशन के अलावा बड़ी रस्सियां भी बरामद हुईं थीं। तब जांच एजेंसियों का अनुमान था कि फिदायीन दस्ते की मंशा बच्चों को बंधक बनाने की थी।
स्कूल के पास पहले हो चुका है हमला
इससे पहले श्रीनगर के बेमिना में सीआरपीएफ कैंप पर हुआ था जिसमें पांच जवान मारे गए थे। वह फिदायीन हमला पुलिस पब्लिक स्कूल से सटे कैंप पर था।
स्कूल में अवकाश के कारण बच्चों को नुकसान नहीं हुआ। दरअसल हमले से कई दिनों पहले से आतंकी बच्चों के साथ ही क्रिकेट खेलते रहे थे और हमले के दिन क्रिकेट के किट बैग में ही हथियार लेकर आए थे।
इस पृष्ठभूमि के मद्देनजर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।