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Jammu kashmir News : अमन के साथ विधानसभा चुनाव की ओर कदम, घाटी में तेजी से बन-बिगड़ रहे हैं सियासी समीकरण
Mon, 05 Sep 2022 04:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा
महेंद्र तिवारी, नई दिल्ली
महेंद्र तिवारी, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 05 Sep 2022 04:07 AM IST
सार
Jammu kashmir News : गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के हालात को बदलने के लिए मंत्रालय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशन में मुकम्मल व चरणबद्ध रणनीति के साथ काम कर रहा है। इस माहौल को बनाने में सरकार की पांच सूत्रीय रणनीति काम आई।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर अब अमन के साथ विधानसभा चुनाव के लिए तैयार हो रहा है। सियासी समीकरण तेजी से बन-बिगड़ रहे हैं। इस माहौल को बनाने में सरकार की पांच सूत्रीय रणनीति काम आई। इसमें संविधान के अनुच्छेद 370 व 35ए को निरस्त करने के साथ यूएपीए एक्ट व एनआईए एक्ट में संशोधन, व्यक्ति को भी दहशतगर्द घोषित करने, आतंकियों के महिमामंडन पर प्रतिबंध तथा भारत से पाकिस्तान में पढ़ने जाने व पाकिस्तान की शैक्षिक योग्यता से यहां नौकरी पर रोक अहम पहलों में शामिल है।
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गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के हालात को बदलने के लिए मंत्रालय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशन में मुकम्मल व चरणबद्ध रणनीति के साथ काम कर रहा है। अनुच्छेद 370 व 35ए के निरस्तीकरण व एनआईए एक्ट व यूएपीए एक्ट में संशोधन से केंद्र सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का संदेश साफ हुआ। इसमें भारत के बाहर होने वाले आतंकी अपराधों की जांच के लिए एनआईए का क्षेत्राधिकार बढ़ाया गया। संस्थाओं के साथ व्यक्तियों को भी आतंकी घोषित करने का अधिकार दिया गया। इसके तहत अब तक 38 लोगों को आंतकी घोषित किया जा चुका है।
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आतंकवादियों का महिमामंडन बंद : पहले आतंकवादियों की अंत्येष्टि का अधिकार था। आतंकवादियों व अलगाववादियों ने इसका बार-बार उल्लंघन किया। वह राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इन अवसरों का दुरुपयोग करते थे। अब अंत्येष्टि तय प्रोटोकॉल के तहत ही हो सकती है। प्रोटोकाल का सख्ती से पालन अनिवार्य है।
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ये बदलाव दिखा रहे असर...आम लोगों को सीधा फायदा
- अनुच्छेद 370 और 35ए के निरस्तीकरण से जम्मू और कश्मीर का भारत में संपूर्ण एकीकरण
- सामान संघीय अधिकार : दो केंद्रशासित प्रदेशों के गठन के जरिये अन्य राज्यों के बराबर लाया गया
- एक संविधान, एक ध्वज : भारतीय संविधान-कानून के सभी प्रावधान लागू। जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा खत्म
- एक नागरिकता, एक केन्द्रीय कानून : दो तरह की नागरिकता खत्म। कश्मीरी, डोगरी, उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी भाषाएं जम्मू-कश्मीर की राजभाषाएं बनीं
- लखनपुर टोल टैक्स रद्द : पहले भारतीयों को रियासत में प्रवेश करने लिए अनुमति आवश्यक थी। भारतीय वाहनों पर टैक्स था
- दो दरबार नहीं : 150 वर्ष पुरानी परंपरा खत्म, 200 करोड़ की बचत। जम्मू-श्रीनगर दोनों ही सचिवालय साल भर खुले रहते हैं
- आरक्षण : एलओसी निवासियों के बाद अब आईबी के पास रहने वालों को 4% व आर्थिक रूप से कमजोरों को भी 10% आरक्षण
- डोमिसाइल : सफाईकर्मी भी डोमिसाइल सर्टिफिकेट के पात्र
- अनुसूचित जनजाति : अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वनवासी (अधिकारों की मान्यता) कानून 2006 लागू
- पुनर्वास : पहले चरण में 3000 अतिरिक्त कश्मीरी प्रवासियों को सरकारी नौकरी। 1,739 को नियुक्ति। अन्य 1,098 का चयन। प्रवासियों के लिए ट्रांजिट आवास भी बनाया जा रहा है