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Jammu News: ढाई दशक बाद वुलर झील में आई ‘नदरू’ की बहार
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कमल के तने (नदरू) से भरा वुलर झील।
- फोटो : shrinagar news
बांदीपोरा। करीब 25 साल से ज़्यादा समय के बाद वुलर झील में कमल के तने (नदरू) की बहार आई है। इस बदलाव का श्रेय मुख्य रूप से चल रही वुलर झील संरक्षण और प्रबंधन परियोजना को जाता है, जिसमें झील के पारिस्थितिक संतुलन को बहाल करने के लिए ड्रेजिंग, डिसिल्टिंग व अन्य उपाय शामिल हैं। स्थानीय लोग नदरू की वापसी को सकारात्मक विकास मान रहे हैं, जो आर्थिक अवसर लेकर आया है। पारंपरिक कश्मीरी व्यंजनों के साथ सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत कर रहा है।
बांदीपोरा जिले के दर्जनों गांव एशिया की इस दूसरी सबसे बड़ी झील के किनारे बसे हैं, जो मछली, सिंघाड़े और अब कमल के तने सहित वुलर के संसाधनों पर निर्भर हजारों मछुआरों को आय प्रदान करती है। नदरू पारंपरिक कश्मीरी व्यंजनों जैसे नदरू यखनी, नदरू मोनजी, नदरू चिटनी और नदरू अचार में एक प्रमुख सामग्री है। इसकी वापसी इन पाक परंपराओं को पुनर्जीवित करने में मदद करेगी।
परियोजना से जुड़े अधिकारी मुदासिर अहमद ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान ड्रेजिंग और डीसिल्टिंग प्रक्रिया ने इस कीमती पौधे के पुनरुत्थान को सक्षम किया है।
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बांदीपोरा जिले के दर्जनों गांव एशिया की इस दूसरी सबसे बड़ी झील के किनारे बसे हैं, जो मछली, सिंघाड़े और अब कमल के तने सहित वुलर के संसाधनों पर निर्भर हजारों मछुआरों को आय प्रदान करती है। नदरू पारंपरिक कश्मीरी व्यंजनों जैसे नदरू यखनी, नदरू मोनजी, नदरू चिटनी और नदरू अचार में एक प्रमुख सामग्री है। इसकी वापसी इन पाक परंपराओं को पुनर्जीवित करने में मदद करेगी।
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परियोजना से जुड़े अधिकारी मुदासिर अहमद ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान ड्रेजिंग और डीसिल्टिंग प्रक्रिया ने इस कीमती पौधे के पुनरुत्थान को सक्षम किया है।
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