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Jammu News: बिना न्यायिक अनुमति दायर सप्लीमेंट्री शिकायत खारिज, दो आरोपी रिहा
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सांबा। प्रधान सत्र न्यायालय ने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की तरफ से दायर सप्लीमेंट्री शिकायत को खारिज कर दिया। दोनों आरोपियों को रिहा करने के आदेश दिए।
अदालत ने कहा कि ट्रायल लंबित रहने के दौरान आगे की जांच करने और सप्लीमेंट्री शिकायत दाखिल करने से पहले अदालत की स्पष्ट अनुमति लेना जरूरी था जो एनसीबी ने नहीं ली।
मामला एनसीबी के अपराध वर्ष 2022 से जुड़ा है। एनसीबी ने 21 फरवरी 2026 को दिल्ली निवासी निकेत कंसल और जतिश बब्बर के खिलाफ सप्लीमेंट्री शिकायत दाखिल की थी। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि मूल शिकायत दाखिल होने के बाद एजेंसी ने आगे की जांच के लिए अदालत से अनुमति नहीं ली और न ही कानून में तय 90 दिन की अवधि में जांच पूरी की।
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एनसीबी की ओर से कहा गया कि मूल शिकायत में भविष्य में अन्य आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री शिकायत दाखिल करने की अनुमति मांगी गई थी। हालांकि अदालत ने कहा कि केवल अनुमति मांगना पर्याप्त नहीं है, जब तक अदालत स्पष्ट आदेश पारित न करे।
प्रधान सत्र न्यायाधीश अश्विनी कुमार शर्मा की अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बिना न्यायिक अनुमति आगे की जांच कानूनन मान्य नहीं है। अदालत ने दोनों आरोपियों को किसी अन्य मामले में वांछित न होने पर रिहा करने के आदेश दिए।
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अदालत ने कहा कि ट्रायल लंबित रहने के दौरान आगे की जांच करने और सप्लीमेंट्री शिकायत दाखिल करने से पहले अदालत की स्पष्ट अनुमति लेना जरूरी था जो एनसीबी ने नहीं ली।
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मामला एनसीबी के अपराध वर्ष 2022 से जुड़ा है। एनसीबी ने 21 फरवरी 2026 को दिल्ली निवासी निकेत कंसल और जतिश बब्बर के खिलाफ सप्लीमेंट्री शिकायत दाखिल की थी। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि मूल शिकायत दाखिल होने के बाद एजेंसी ने आगे की जांच के लिए अदालत से अनुमति नहीं ली और न ही कानून में तय 90 दिन की अवधि में जांच पूरी की।
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एनसीबी की ओर से कहा गया कि मूल शिकायत में भविष्य में अन्य आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री शिकायत दाखिल करने की अनुमति मांगी गई थी। हालांकि अदालत ने कहा कि केवल अनुमति मांगना पर्याप्त नहीं है, जब तक अदालत स्पष्ट आदेश पारित न करे।
प्रधान सत्र न्यायाधीश अश्विनी कुमार शर्मा की अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बिना न्यायिक अनुमति आगे की जांच कानूनन मान्य नहीं है। अदालत ने दोनों आरोपियों को किसी अन्य मामले में वांछित न होने पर रिहा करने के आदेश दिए।