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Jammu News: टैक्स में अपेक्षित राहत नहीं मिलने से महिलाओं में निराशा
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सांबा। केंद्रीय बजट में बचत को प्रोत्साहित करने वाले ठोस उपायों और प्रत्यक्ष कर राहत की कमी ने सांबा की महिलाओं को निराश किया है। घरेलू वित्त संभालने वाली महिलाओं का कहना है कि महंगाई के इस दौर में टैक्स में अपेक्षित राहत न मिलने से घर का बजट संतुलित करना और मुश्किल हो गया है।
स्थानीय महिला आशु देवी का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि बजट से टैक्स में कुछ राहत मिलेगी। इससे मासिक बचत बढ़ाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि राशन, बिजली और बच्चों की पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है। महंगाई और टैक्स में राहत न मिलने से भविष्य के लिए बचत करना कठिन होता जा रहा है।
शालू देवी ने बताया कि घरेलू जरूरतों के साथ-साथ स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि अगर बचत योजनाओं पर अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलता या टैक्स में छूट दी जाती तो महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिलता। फिलहाल हर महीने का हिसाब जोड़ना चुनौती बन गया है। महिला रीना देवी का कहना है कि वे टैक्स स्लैब में ठोस बदलाव की उम्मीद कर रही थीं। उन्होंने बताया कि आय का बड़ा हिस्सा टैक्स और जरूरी खर्चों में चला जाता है। बेहतर बचत विकल्प और कर राहत होती तो भविष्य के लिए निवेश करना आसान होता।
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महिलाओं का मानना है कि यदि सरकार बचत योजनाओं को मजबूत करती और रोजमर्रा उपयोग की चीजें सस्ती करती और प्रत्यक्ष कर में व्यावहारिक राहत देती तो घरेलू बजट पर दबाव कम हो सकता था। फिलहाल बजट के बाद मध्यम वर्गीय परिवारों, खासकर महिलाओं के सामने आर्थिक संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
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स्थानीय महिला आशु देवी का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि बजट से टैक्स में कुछ राहत मिलेगी। इससे मासिक बचत बढ़ाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि राशन, बिजली और बच्चों की पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है। महंगाई और टैक्स में राहत न मिलने से भविष्य के लिए बचत करना कठिन होता जा रहा है।
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शालू देवी ने बताया कि घरेलू जरूरतों के साथ-साथ स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि अगर बचत योजनाओं पर अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलता या टैक्स में छूट दी जाती तो महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिलता। फिलहाल हर महीने का हिसाब जोड़ना चुनौती बन गया है। महिला रीना देवी का कहना है कि वे टैक्स स्लैब में ठोस बदलाव की उम्मीद कर रही थीं। उन्होंने बताया कि आय का बड़ा हिस्सा टैक्स और जरूरी खर्चों में चला जाता है। बेहतर बचत विकल्प और कर राहत होती तो भविष्य के लिए निवेश करना आसान होता।
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महिलाओं का मानना है कि यदि सरकार बचत योजनाओं को मजबूत करती और रोजमर्रा उपयोग की चीजें सस्ती करती और प्रत्यक्ष कर में व्यावहारिक राहत देती तो घरेलू बजट पर दबाव कम हो सकता था। फिलहाल बजट के बाद मध्यम वर्गीय परिवारों, खासकर महिलाओं के सामने आर्थिक संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।