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जम्मू-कश्मीर में मार्च 2023 तक सात लाख स्मार्ट मीटर लगेंगे
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जम्मू। जम्मू कश्मीर में मार्च 2023 तक बिजली के सात लाख स्मार्ट मीटरों को स्थापित करके चालू कर दिया जाएगा। इसके साथ बिलिंग के लिए फ्लैट रेट प्रणाली को खत्म करके खराब मीटरों को दुरुस्त किया जाएगा। प्रदेश में सबसे अधिक बिजली हानि वाले फीडरों की पहचान करके जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। किश्तवाड़-खिलैनी विद्युत लाइन को शीघ्र पूरा किया जाएगा। मुख्य सचिव डा. अरुण कुमार मेहता ने मंगलवार को नागरिक सचिवालय में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर बिजली क्षेत्र की समीक्षा की।
मुख्य सचिव को बताया गया कि जम्मू और श्रीनगर शहरों में 1.15 लाख स्मार्ट मीटरों के अलावा अतिरिक्त 6 लाख मीटर लगाए जाएंगे। 91 प्रतिशत स्थापित स्मार्ट मीटर पहले से ही संचार कर रहे हैं और इनमें 64 हजार से अधिक मीटरों का जून 2022 तक बिल भेजा जा चुका है। मुख्य सचिव ने कहा कि स्मार्ट मीटर की स्थापना में जम्मू कश्मीर को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आगामी सर्दियों के मौसम के मद्देनजर बिजली खरीद और प्रबंधन के लिए उचित योजना बनाई जाएगी। मुख्य सचिव ने ट्रांसफार्मरों के रखरखाव पर जोर दिया। गुणवत्ता वाली बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बकाया भुगतान जरूरी है और इसके लिए अभियान शुरू किया जाए। उन्होंने बिजली आपूर्ति के मांग पक्ष प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने और बिजली खरीद का स्वतंत्र आडिट कराने पर जोर दिया। औसत राजस्व प्राप्ति (एआरआर) की तुलना में प्रति यूनिट बिजली की औसत लागत (एसीएस) के बीच के अंतर से नुकसान को न्यूनतम तक लाया जाए। उपभोक्ताओं को बिल जनरेट होने पर एसएमएस का अलर्ट प्रदान किया जाए।
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मुख्य सचिव को बताया गया कि जम्मू और श्रीनगर शहरों में 1.15 लाख स्मार्ट मीटरों के अलावा अतिरिक्त 6 लाख मीटर लगाए जाएंगे। 91 प्रतिशत स्थापित स्मार्ट मीटर पहले से ही संचार कर रहे हैं और इनमें 64 हजार से अधिक मीटरों का जून 2022 तक बिल भेजा जा चुका है। मुख्य सचिव ने कहा कि स्मार्ट मीटर की स्थापना में जम्मू कश्मीर को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आगामी सर्दियों के मौसम के मद्देनजर बिजली खरीद और प्रबंधन के लिए उचित योजना बनाई जाएगी। मुख्य सचिव ने ट्रांसफार्मरों के रखरखाव पर जोर दिया। गुणवत्ता वाली बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बकाया भुगतान जरूरी है और इसके लिए अभियान शुरू किया जाए। उन्होंने बिजली आपूर्ति के मांग पक्ष प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने और बिजली खरीद का स्वतंत्र आडिट कराने पर जोर दिया। औसत राजस्व प्राप्ति (एआरआर) की तुलना में प्रति यूनिट बिजली की औसत लागत (एसीएस) के बीच के अंतर से नुकसान को न्यूनतम तक लाया जाए। उपभोक्ताओं को बिल जनरेट होने पर एसएमएस का अलर्ट प्रदान किया जाए।
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