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घाटी से अब श्रमिक भी वापस लौटने लगे
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जम्मू। घाटी में आतंकियों द्वारा लक्षित हत्याओं से अब श्रमिक भी डर गए हैं। उन्होंने भी अपने घरों को लौटना शुरू कर दिया है। श्रमिकों के अनुसार घर का खर्चा चलाने के लिए काम करने आए थे मगर अब श्रमिकों की भी हत्या की जा रही है। ऐसे में वापस जाने से कम से कम जान तो बच जाएगी।
सरोज कुमार निवासी लखीमपुरखीरी यूपी ने कहा कि वह पुलवामा में काम करते हैं। टारगेट किलिंग के बाद वे सहम गए हैं। ऐसे में घर लौटने का फैसला लिया है। रेलवे स्टेशन पर गाड़ी आने का इंतजार कर रहे हैं। कम से कम जान तो बच जाएगी। घाटी में काम करने से डर लग रहा है। पता नहीं कब क्या हो जाए। जान है तो जहान है।
इसी तरह अनिल, दीपक, जावेद खान निवासी गणेशपुर यूपी ने कहा कि घर में भी हालात ठीक नहीं हैं। परिवार का पालन पोषण खुद ही करना पड़ता है। आतंकियों ने मौत के घाट उतार दिया तो कौन परिवार पालेगा। चिंता सता रही है। ऐसे में वापस जाने का फैसला लिया है। अब दूसरे राज्य में रोजगार की तलाश करेंगे। इसी तरह कश्मीरी पंडितों पर हो रहे आतंकी हमले के बाद पलायन जारी है। वहीं, अलग-अलग जिलों में सेवारत कर्मचारी भी वापस पहुंचने शुरू हो गए हैं। अध्यापिका की हत्या के बाद कर्मचारियों में दहशत का माहौल है।
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सरोज कुमार निवासी लखीमपुरखीरी यूपी ने कहा कि वह पुलवामा में काम करते हैं। टारगेट किलिंग के बाद वे सहम गए हैं। ऐसे में घर लौटने का फैसला लिया है। रेलवे स्टेशन पर गाड़ी आने का इंतजार कर रहे हैं। कम से कम जान तो बच जाएगी। घाटी में काम करने से डर लग रहा है। पता नहीं कब क्या हो जाए। जान है तो जहान है।
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इसी तरह अनिल, दीपक, जावेद खान निवासी गणेशपुर यूपी ने कहा कि घर में भी हालात ठीक नहीं हैं। परिवार का पालन पोषण खुद ही करना पड़ता है। आतंकियों ने मौत के घाट उतार दिया तो कौन परिवार पालेगा। चिंता सता रही है। ऐसे में वापस जाने का फैसला लिया है। अब दूसरे राज्य में रोजगार की तलाश करेंगे। इसी तरह कश्मीरी पंडितों पर हो रहे आतंकी हमले के बाद पलायन जारी है। वहीं, अलग-अलग जिलों में सेवारत कर्मचारी भी वापस पहुंचने शुरू हो गए हैं। अध्यापिका की हत्या के बाद कर्मचारियों में दहशत का माहौल है।
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