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जम्मू-कश्मीर में इस साल गठित होंगे 11 हजार स्वयं सहायता समूह
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जम्मू। उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में 52 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह साढ़े चार लाख से अधिक महिलाओं के जीवन में बदलाव ला रहे हैं। इस साल 11 हजार और स्वयं सहायता समूह गठित करने का फैसला किया गया है ताकि उनकी क्षमताओं को आर्थिक क्षेत्र तथा विकास में स्थान मिल सके। वह टीचर्स भवन में आयोजित सहकारिता सप्ताह के शुभारंभ के अवसर पर बोल रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सहकारिता सुपर बाजार जम्मू के आधुनिकीकरण का ई-शुभारंभ भी किया।
उन्होंने कहा कि पारदर्शी व्यवस्था, चुनाव व जवाबदेही तय करने के साथ ही अब सभी सहकारिता संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वह लाभकारी संस्था बनने के प्रयास करे। सहकारिता क्षेत्र को और संगठित करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि उत्पादन व मूल्य संवर्धन में वह न केवल देश बल्कि विश्व बाजार में भी प्रतिस्पर्धी बन सके। कहा कि नई सहकारिता समितियों को तीन करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता मुहैया कराई जा रही है। यदि संस्था विस्तार करना चाहती है तो केंद्र सरकार व नाबार्ड भी सहयोग कर रही है। सहकारिता समितियों को गुणवत्ता, सेवा व मूल्य का मूल मंत्र देते हुए कहा कि इससे समाज के कमजोर तबके के हितों की रक्षा निश्चित रूप से हो सकेगी।
इससे पहले उन्होंने खाद्य उत्पादक संगठनों को पंजीकरण प्रमाणपत्र तथा सहकारिता शिक्षा व शोध संस्थान को पांच लाख रुपये का चेक दिया। साथ ही सहकारिता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रमुख हितधारकों को सम्मानित किया। सहकारिता विभाग की सचिव यशा मुद्गल ने बताया कि वर्तमान में 20 खाद्य उत्पादक संगठनों का सहकारिता समितियों के रूप में पंजीकरण हुआ है। इससे छह हजार लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि पारदर्शी व्यवस्था, चुनाव व जवाबदेही तय करने के साथ ही अब सभी सहकारिता संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वह लाभकारी संस्था बनने के प्रयास करे। सहकारिता क्षेत्र को और संगठित करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि उत्पादन व मूल्य संवर्धन में वह न केवल देश बल्कि विश्व बाजार में भी प्रतिस्पर्धी बन सके। कहा कि नई सहकारिता समितियों को तीन करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता मुहैया कराई जा रही है। यदि संस्था विस्तार करना चाहती है तो केंद्र सरकार व नाबार्ड भी सहयोग कर रही है। सहकारिता समितियों को गुणवत्ता, सेवा व मूल्य का मूल मंत्र देते हुए कहा कि इससे समाज के कमजोर तबके के हितों की रक्षा निश्चित रूप से हो सकेगी।
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इससे पहले उन्होंने खाद्य उत्पादक संगठनों को पंजीकरण प्रमाणपत्र तथा सहकारिता शिक्षा व शोध संस्थान को पांच लाख रुपये का चेक दिया। साथ ही सहकारिता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रमुख हितधारकों को सम्मानित किया। सहकारिता विभाग की सचिव यशा मुद्गल ने बताया कि वर्तमान में 20 खाद्य उत्पादक संगठनों का सहकारिता समितियों के रूप में पंजीकरण हुआ है। इससे छह हजार लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
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