राजस्थान के बाद जम्मू-कश्मीर में सबसे अधिक सौर ऊर्जा क्षमता
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जलवायु परिवर्तन से पृथ्वी के लिए पैदा हो रहे खतरे के मद्देनजर निरोधात्मक कार्ययोजना पर अमल शुरू हो गया है। संयुक्त राष्ट्र के फ्रेमवर्क के तहत घोषित आईएनडीसी के लक्ष्य हासिल करने के लिए सौर ऊर्जा की उच्च क्षमता वाले राज्यों की पहचान कर ली गई है।
बिजली के लिए थर्मल पावर प्लांट पर निर्भरता को कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने की दिशा में पर्यावरण और ऊर्जा मंत्रालय ने संयुक्त रणनीति बनाई है।
भारत ने कार्बन उत्सर्जन को 33 से 35 प्रतिशत घटाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में लक्ष्य प्राप्ति को प्राथमिकता दी जा रही है। पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक देश में सबसे अधिक सौर ऊर्जा क्षमता राजस्थान के पास है।
दूसरे स्थान पर जम्मू-कश्मीर है
राजस्थान में 142.31 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता है। एक गीगावाट में एक हजार मेगावाट होता है। दूसरे स्थान पर जम्मू-कश्मीर है, जहां 111.05 गीगावाट सौर ऊर्जा का दोहन संभव है। महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में 64.32 और 61.66 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता है। अन्य राज्यों में यह क्षमता 40 गीगावाट से कम है।
हिमाचल प्रदेश में 33.84, उत्तर प्रदेश में 22.83, उत्तराखंड में 16.80, हरियाणा में 4.56, पंजाब में 2.81 और दिल्ली में 2.05 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता की पहचान की गई है। इस तरह देश में कुल 748.98 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर सौ से अधिक देशों के बीच हुए अंतरराष्ट्रीय सौर संधि के तहत भारत को अन्य देशों से भी सौर ऊर्जा हासिल हो सकती है।
केंद्र सरकार ने 2022 तक 40 हजार मेगावाट सौर ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्यवार लक्ष्य तय कर दिया है। सभी सरकारी, आवासीय और व्यावसायिक भवनों की छतों पर सौर ऊर्जा के पैनल लगाने की दिशा में राज्यों सरकारों को निर्देश जारी किए गए हैं।