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आरएस पुरा के लाल को नमन करने उमड़ा जनसैलाब, नम आंखों से दी अंतिम विदाई

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आरएस पुरा (जम्मू)। उत्तराखंड में मंगलवार को भारत-चीन सीमा पर पेट्रोलिंग करते भूस्खलन की चपेट में आने से शहीद हुए आरएस पुरा के लाल सिपाही सुखजिंद्र सिंह को नमन करने जनसैलाब उमड़ पड़ा। नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई दी गई। कस्बे के वार्ड-8 में वीरवार सुबह जब शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचा तो पूरा गांव सुखजिंद्र सिंह अमर रहे व भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। सुबह आठ बजे के करीब सेना के वाहन में सुखजिंद्र सिंह का पार्थिव शरीर पहुंचा तो हर कोई उनके घर की ओर दौड़ पड़ा। आरएस पुरा से सतवारी चौक में बाइक रैली के रूप में पहुंचे सैकड़ों युवाओं ने हाथों में तिरंगा लेकर शहीद को श्रद्धांजलि दी। परिवार वालों का रो-रोकर बुला हाल था। तिरंगे में लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो वहंा मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। मां दर्शना कौर व बहन रो-रोकर बेसुध हो रहीं थीं। शहीद सुखजिंद्र का पार्थिव शरीर सेना की गाड़ी में कस्बे के श्मशानघाट तक पहुंचाया गया। जहां सेना, प्रशासनिक अधिकारियों, राजनेता पूर्व मंत्री चौ. शाम लाल, सुचेतगढ़ के डीडीसी सदस्य तरनजीत सिंह टोनी, एसडीएम रामलाल शर्मा व स्थानीय लोगों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी।
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सेना के जवानों ने सलामी देने के साथ मातमी धुन बजाकर नमन किया। शहीद के पिता सेवानिवृत्त कैप्टन परमजीत सिंह ने जैसे ही बेटे की चिता को मुखाग्नि दी तो हर कोई इस पल को देख भावुक हो उठा।
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बता दें कि जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फेंट्री के जवान सुखजिंद्र सिंह दो वर्ष पहले सेना में भर्ती हुए थे। सुखजिंद्र ने अगस्त में बहन की शादी के लिए की जा रही तैयारियों के चलते छुट्टी पर आने का वादा किया था।
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सहपाठी बोले- अच्छा दोस्त खो दिया
पिता परमजीत सिंह ने कहा कि इस प्रकार बेटे के चले जाने पर दुख है, लेकिन अगर बेटा देश की सीमा पर बलिदान देता तो इतना दुख नहीं होता। सुखजिंद्र ने प्रारंभिक शिक्षा कस्बे के नागमनी हाई स्कूल व 12वीं की पढ़ाई मदर इंडिया स्कूल में की थी। उसके सहपाठियों ने बताया कि वह क्रिकेट का शौकीन था और खेलता था। पढ़ाई में बेहतर होने के साथ पिता द्वारा सेना में कार्यरत होने पर कई बहादुरी के किस्से भी सुनाता था। कहा कि उन्होंने अपना एक अच्छा दोस्त खो दिया, जिसके चले जाने का दुख हमेशा रहेगा।
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