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जम्मू कश्मीर: सरकारी कर्मियों के बीमा घोटाले की जांच में एफआईआर रद्द करने से कोर्ट का इंकार
Thu, 28 Mar 2024 01:09 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Thu, 28 Mar 2024 01:09 PM IST
सार
न्यायाधीश ने दलीलें सुनने के बाद कहा कि जहां तक वर्तमान मामले का सवाल है। याचिकाकर्ता और अन्य सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ कंपनी के खिलाफ भी आरोप लगाए गए हैं जिनकी विस्तार से जांच की जानी आवश्यक है ।
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न्यायालय
- फोटो : file photo
विस्तार
ट्रिनिटी रि-इंश्योरेंस ब्रोकर्स लिमिटेड कंपनी के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने इंकार कर दिया है। सीबीआई को मामले की जांच तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया। उक्त कंपनी ने प्रदेश के सरकारी कर्मियों का बीमा करने के नाम पर घोटाला किया था। बुधवार को न्यायाधीश रजनीश ओसवाल ने कंपनी की याचिका पर सुनवाई की।
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न्यायाधीश ने दलीलें सुनने के बाद कहा कि जहां तक वर्तमान मामले का सवाल है। याचिकाकर्ता और अन्य सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ कंपनी के खिलाफ भी आरोप लगाए गए हैं जिनकी विस्तार से जांच की जानी आवश्यक है । इस स्तर पर जब जांच अंतिम चरण में नहीं पहुंची है और जांच एजेंसी अभी साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया चल रही है, ऐसे में एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती। तथ्य अभी भी धुंधले और स्पष्ट नहीं हैं, ऐसे में याचिकाकर्ता-कंपनी द्वारा उठाया गया तर्क गलत है।
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याचिकाकर्ता द्वारा उठाया गया दूसरा तर्क यह है कि एक बार जब एसीबी ने इसी तरह के आरोपों की विस्तार से जांच की थी तो सीबीआई एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती। न्यायालय ने सीबीआई द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड की जांच की है और पाया है कि सीबीआई न केवल कंपनी के अनुबंध के आवंटन की जांच कर रही है, बल्कि याचिकाकर्ता-कंपनी की बीमा दलाल के रूप में नियुक्ति की भी जांच कर रही है।
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तीसरा तर्क है कि एफआईआर दर्ज करने में चार साल की देरी हुई है। केवल इस आधार पर कि एफआईआर में देरी की गई है मानकर इसे रद्द नहीं किया जा सकता है क्योंकि पहले इस मामले की जांच एसीबी द्वारा की जा रही थी जिसने 27.11.2019 और 08.02.2022 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इन टिप्पणियों के साथ अदालत को विवादित एफआईआर को रद्द करने के उद्देश्य से उदारता दिखाने का कोई कारण नहीं मिला।