जम्मू-कश्मीर: जलवायु परिवर्तन का बच्चों का पड़ रहा असर, बढ़ने लगी निमोनिया-एलर्जी की शिकायत
विशेषज्ञों के अनुसार सर्दी और प्रदूषण बढ़ने से जनजीवन के साथ स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ा है। एलर्जी की वायरल बीमारियों में बच्चों में खांसी, जुकाम और बुखार हावी हुआ है। शहर के प्रमुख जच्चा बच्चा अस्पताल एसएमजीएस में रोजाना 300-400 बच्चे इलाके लिए पहुंच रहे हैं।
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दो दशक में जलवायु परिवर्तन का सेहत पर असर दिखा है। मौसम में उतार चढ़ाव से कई बीमारियों का प्रभाव बढ़ रहा है। खासतौर पर शारीरिक क्षमता से कमजोर बच्चों में निमोनिया और एलर्जी की शिकायत बढ़ी है। इन बीमारियों में अब लंबे उपचार के बाद बच्चे ठीक हो रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार सर्दी और प्रदूषण बढ़ने से जनजीवन के साथ स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ा है। एलर्जी की वायरल बीमारियों में बच्चों में खांसी, जुकाम और बुखार हावी हुआ है। शहर के प्रमुख जच्चा बच्चा अस्पताल एसएमजीएस (श्री महाराजा गुलाब सिंह) अस्पताल में रोजाना 300-400 की बाल ओपीडी में पचास प्रतिशत मामले निमोनिया और सर्दी के पहुंच रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डा. संजीव डिंगरा ने बताया कि मौजूदा समय में तापमान काफी गिर गया है और इस साल सर्दी लंबी खींचती नजर आ रही है। सर्द हवाओं की चपेट में आने से बच्चे जल्दी बीमार होते हैं। यह ठंड निमोनिया का कारण बनती है। इस मौसम में बच्चों के पहनावे पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
खानपान में बच्चों को ठंडी चीजें नहीं देनी चाहिए। इसी तरह वायरल बीमारियों का प्रभाव लंबे समय तक देखा जा रहा है। जीएमसी के मेडिसिन विभाग के एचओडी डा. फैयाज वानी का कहना है कि इस मौसम में खांसी, जुकाम और बुखार के मरीजों में बढ़ोतरी हुई है।
विभाग की सामान्य 250-300 की ओपीडी में 70-80 मरीज सर्दी से जुड़ी बीमारियों के आ रहे हैं। मौसम विशेषज्ञ यशपाल शर्मा का कहना है कि पिछले कुछ सालों में सर्दी का अंतराल बढ़ा है। इस साल सितंबर-अक्तूबर में प्रदेश के लगभग जिलों में खूब बारिश हुई।
जो कुछ सालों पहले तक कम हो रही थी। पहले के वर्षों में सूखा का अंतराल अधिक लंबा रहता था, लेकिन इस बार सर्दी का अंतराल बढ़ा है। नए साल के शुरू में ही जम्मू में दिन का तापमान 5 से 8 डिग्री सेल्सियस चल रहा है, जो सामान्य से कम है।
यूनिसेफ दे रहा जागरूकता को बढ़ावा
यूनिसेफ की ओर से जलवायु परिवर्तन में सेहत को दुरुस्त रखने के लिए समय समय पर जागरूकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। निमोनिया से बचाव के लिए नियमित रूप से बच्चों का टीकाकरण किया जाता है। इस लिए बच्चों में सभी टीके समय पर लगाने चाहिए।
ये बरतें सावधानी
1. तापमान गिरने पर बच्चों को गर्म कपड़े पहना कर रखें
2. जरूरी होने पर ही बच्चों को बाहर के वातावरण में बाहर ले जाएं
3. कड़ाके की ठंड में बच्चों को गुनगुना पानी पीने को दें, ठंडे पानी से परहेज करें
4. बच्चों को डाक्टर की सलाह पर ही दवा दें
5. बच्चों में सुस्ती या बीमारी के अन्य लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें
6. कमरे में तापमान के मुताबिक की रूम हीटर को चलाएं
7. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार दें