जानिए, रेल बजट में क्या चाहते हैं जम्मूवासी
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संसद में छब्बीस फरवरी को रेल बजट पेश किया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार से रेल यात्री भाड़ा एवं सुविधाओं को लेकर बड़ी अपेक्षाएं हैं।
जम्मू रेलवे स्टेशन का दर्जा बढ़ाने, डीआरएम दफ्तर जम्मू में स्थापित करने, पर्यटन स्टेशन जम्मू होने के कारण यात्रियों को भरपूर सुविधा देने के साथ-साथ संवेदनशील स्टेशन जम्मू को माने जाने के बाद इस स्टेशन को अब तक कोई भी सुविधा नहीं उपलब्ध हो पाई।
जम्मू रेलवे स्टेशन की सुरक्षा के लिए निगरानी टावर अभी तक नहीं लग सके। डीआरएम कार्यालय भी बजट में घोषणा के बाद स्थापित नहीं हो सका। दूसरी ओर, मोदी सरकार के पहले रेल बजट से उम्मीदों में जहां लंबी दूरी की ट्रेनों को माता वैष्णो देवी रेलवे स्टेशन कटड़ा तक ले जाने जैसे मुद्दे शामिल हैं, वहीं रेलवे स्टेशन जम्मू के प्लेटफार्म विस्तार का मुद्दा भी सम्मिलित है।
प्लेटफार्म विस्तार का मुद्दा लटका
प्लेटफार्म विस्तार का मुद्दा अभी भी लटका पड़ा हुआ है। जबसे जम्मू
रेलवे स्टेशन बना, तबसे से अब तक तीन ही प्लेटफार्म मौजूद हैं और ट्रेनों
की संख्या लगातार बढ़ कर अब करीब 35 हो गई है।
डीआरएम दफ्तर हवा-हवाई
पिछली सरकार द्वारा जारी रेल बजट में जम्मू में डीआरएम दफ्तर खोले जाने की घोषणा हवा-हवाई निकली। जिस पर अभीतक कोई काम नहीं हो सका। हालांकि इसको लेकर पूरे वर्ष चर्चाएं होती रहीं, लेकिन जमीनी स्तर पर इस दिशा में कोई भी कदम नहीं उठ सका।
बातों में ही बना माडल रेलवे स्टेशन
जम्मू को बनाने के मुद्दे पर अब तक कोई कदम नहीं उठ सका, ताकि इस रेलवे स्टेशन को माडल स्टेशन का दर्जा हासिल हो सके। रैंप के न होने से एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक व्हील चेयर से विकलांग नहीं पहुंच सकते, जिससे व्हील चेयर की सुविधा होने पर भी उन्हें पहले से दूसरे या तीसरे प्लेटफार्म तक पहुंचना मुश्किल होता है।
रेलवे स्टेशन जम्मू में स्वच्छता का अभाव
रेलवे स्टेशन जम्मू में स्वच्छता का अभाव जारी है। जम्मू रेलवे स्टेशन के किसी भी क्षेत्र से स्टेशन के अंदर दाखिल हों, कूड़े कचरे और गंदगी से यात्रियों का सामना करना पड़ता है। स्टेशन के बाहर टैक्सी आटो स्टैंड का मैदान भी मरम्मत के अभाव में पड़ा हुआ है, जिससे जम्मू रेलवे स्टेशन की शान में बहुत बड़ा दाग दिखता है।
सुरक्षा की कमी
जम्मू रेलवे स्टेशन की संवेदनशीलता के मद्देनजर यहां पर कई मांगें प्रस्तावित हैं जो अभी तक पूरी नहीं हो सकीं है। पहला स्टेशन खुला है जिसकी घेराबंदी नहीं हो सकी है। चारदीवारी के न होने से कहीं से भी कोई भी आसानी से आ-जा सकता है। इसे सुरक्षा को लेकर बड़ी कमी कहा जाता है।
स्टेशन पर वाच टावर नहीं लगाए जा सके हैं, जबकि रेलवे ट्रैक पर टेंटों में रहने वाले छह सौ के करीब जवानों को स्थायी तौर से कोई घर नहीं है। बजालता-जम्मू से लेकर कठुआ तक के सभी स्टेशनों पर स्कैनर, एक्स-रे मशीन तथा सीसीटीवी कैमरे लगाने के प्रस्ताव रेलवे के आला अधिकारी को भिजवाए गए हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई भी कदम नहीं उठाए गए हैं।