जम्मू-कश्मीर: बजट का विकास...14 साल में 58 से 180 करोड़ की हो गई कृत्रिम झील, प्रोजेक्ट कब पूरा होगा पता नहीं
झील को बनाने का अहम उद्देश्य पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करना था। जिस झील को 58 करोड़ में तैयार किया जाना था, अब उसकी लागत 180 करोड़ पहुंच गई है।
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सरकारी विभाग पैसों की किस प्रकार बर्बादी कर रहे हैं, इसका उदाहरण कृत्रिम झील परियोजना को देखने पर मिलता है। 14 साल में अभी तक काम पूरा नहीं होना संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। हैरानी तो इस बात की है कि अभी भी काम काफी बचा है और दावे किए जा रहे हैं कि अगले महीने में परियोजना जनसमर्पित कर दी जाएगी।
जमीनी हालात को देखकर ऐसा कुछ नहीं लग रहा। दरअसल, राज्यपाल जगमोहन ने 1986 में प्रोजेक्ट को बनाने की अनुमति दी थी। 5 दिसंबर, 2009 में कांग्रेस और नेकां सरकार के दौरान 58 करोड़ की लागत से काम शुरू करवाया गया। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नींव पत्थर रखा, बाद में किन्हीं कारणों से तीन साल में पूरी होने वाली परियोजना अधर में लटक गई।
2017 में पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने दावा किया था कि आधे से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। इसके बाद 5 अगस्त, 2019 को जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के लागू होने पर प्रशासन ने फिर से काम शुरू करवाया।
उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने परियोजना को स्मार्ट सिटी और तवी रीवर फ्रंट के साथ जोड़ते हुए संबंधित विशेषज्ञों से राय ली। इसके बावजूद हालात ऐसे हैं कि 2012, 2013, 2015, 2016, 2017, 2018 तक छह डेडलाइन पूरी हो चुकी हैं, लेकिन झील अब भी अव्यवस्था की भेंट चढ़ी हुई है।
पर्यटन क्षेत्र में तरक्की के खुलने थे रास्ते
योजना के मुताबिक झील की लंबाई डेढ़ किलोमीटर और चौड़ाई 600 मीटर तय है, जो शहर के चौथे पुल के पास बेलीचराना में बननी है। झील को बनाने का अहम उद्देश्य पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करना है। विकास की बात करें तो सिर्फ बजट में हुआ है। जिस झील को 58 करोड़ में तैयार किया जाना था, अब उसकी लागत 180 करोड़ पहुंच गई है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पैसे बर्बाद करने के लिए परियोजना को धरातल पर उतारा गया, क्योंकि जिम्मेदार दावों में ही काम करवा रहे हैं। वहीं, पिछले साल फरवरी में टेंडर श्री बाला जी इंजीनियरिंग लिमिटेड को दिया गया है और कंपनी भी जल्द काम पूरा होने की बात कर रही है।
लेटलतीफी से होटल कारोबार पर असर
स्थानीय राजकुमार ने बताया कि प्रोजेक्ट अब भी एक सपना है। अगर प्रोजेक्ट पूरा होता है तो पर्यटन को पंख लगेंगे। इसी तरह ऑल जम्मू एंड कश्मीर होटल एंड लॉज एसोसिएशन के प्रधान पवन गुप्ता ने बताया कि प्रोजेक्ट कारोबार के लिए अहम है, लेकिन हालात यह है कि कई होटल बंद हो गए हैं, क्योंकि पर्यटन है ही नहीं। कई लोग होटल के कारोबार को छोड़कर नए कारोबार के साथ जुड़ रहे हैं। प्रशासन को चाहिए कि पर्यटन को बढ़ाने देने के लिए समय पर परियोजनाएं पूरी की जाएं।
अक्टूबर या नवंबर में झील बनकर तैयार हो जाएगी और लोगों को समर्पित कर दी जाएगी। झील लगभग 180 करोड़ की लागत से बनेगी। -राहुल यादव, आयुक्त, नगर निगम
कृत्रिम झील जम्मू के लोगों को लाभ देगी। संभाग में पर्यटन बढ़ेगा और रोजगार के अवसर खुलेंगे। -सुनैना मेहता, संयुक्त निदेशक, पर्यटन विभाग
पहले की कंपनी दिवालिया हो गई। नई कंपनी को ठेका दिया है। निक्की तवी में काम खत्म नहीं हुआ। बड़ी तवी में 80-85 प्रतिशत काम हो चुका है। मौसम ठीक रहा तो जुलाई तक सरकार को परियोजना सौंप देंगे। -एफआर भगत, एक्सईएन, बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई