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गीता-रामायण से रूबरू होंगे जम्मू-कश्मीर के स्कूली बच्चे, उर्दू संस्करण लाइब्रेरी में रखने का आदेश

Tue, 23 Oct 2018 03:08 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Tue, 23 Oct 2018 03:08 AM IST
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jammu and kashmir school students read Ramayan and Geeta in Urdu language
प्रतीकात्मक तस्वीर

रियासत के स्कूली बच्चों और आम लोगों को अब भागवत गीता तथा रामायण से परिचित कराया जाएगा। इसके लिए सभी स्कूल-कॉलेजों में इन दोनों ग्रंथों के उर्दू संस्करण को रखने का फैसला किया गया है ताकि बच्चों व आम लोगों को पढ़ने व समझने में किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े।

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सरकार की ओर से सोमवार को जारी आदेश में कहा गया है कि सर्वानंद प्रेमी लिखित श्रीमद् भागवत गीता तथा कौशर रामायण का उर्दू संस्करण स्कूल-कॉलेजों तथा सार्वजनिक पुस्तकालयों में रखा जाए। इसके लिए स्कूली शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, डायरेक्टर कॉलेज, डायरेक्टर लाइब्रेरी तथा संस्कृति विभाग को पर्याप्त संख्या में इन पुस्तकों को खरीदने को कहा गया है।
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आदेश में कहा गया है कि चार अक्तूबर को राज्यपाल के सलाहकार की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला किया गया था कि सभी स्कूलों, कॉलेजों व पुस्तकालयों में इन दोनों ग्रंथों का उर्दू संस्करण रखा जाए। स्कूली शिक्षा विभाग के अंडर सेक्रेटरी की ओर से जारी आदेश में स्कूल शिक्षा निदेशक (जम्मू व कश्मीर दोनों) को इस आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। 
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विवाद होना तय माना जा रहा
स्कूली शिक्षा विभाग के इस पहल के बाद रियासत में विवाद होना तय माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि आदेश को भगवाकरण की कोशिशों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसलिए कहा जा रहा है कि विभिन्न दलों तथा संस्थाओं की ओर से इस आदेश का विरोध किया जा सकता है।


उमर ने साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री व नेकां नेता उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस आदेश पर निशाना साधा है। ट्वीट किया कि केवल गीता और रामायण ही क्यों? यदि धार्मिक ग्रंथों को स्कूलों, कॉलेजों व पुस्तकालयों में रखना ही है तो अन्य धर्मों को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है? क्यों चुनिंदा ग्रंथों को ही लिया गया?

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