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जम्मू-कश्मीर:न्यायिक अधिकारियों के लिए तबादला नीति बनाने के आदेश, होगा ऐसा बदलाव

Wed, 10 Feb 2021 11:13 AM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Wed, 10 Feb 2021 11:13 AM IST
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Jammu and Kashmir: Order to make transfer policy for judicial officers, such a change will happen
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

हाईकोर्ट ने केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में न्यायिक अधिकारियों के स्थानांतरण के लिए स्थानांतरण नीति बनाने के आदेश दिए हैं। रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी आदेश के अनुसार केंद्र शासित प्रदेशों में न्यायिक अधिकारियों के सामान्य स्थानांतरण मार्च और सितंबर के महीनों में एक वर्ष में दो बार प्रभावी नहीं होने चाहिए, जब तक मुख्य न्यायाधीश द्वारा निर्देशित नहीं किया जाता है।

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न्याय के प्रशासन के हित में अधिकारियों की उपयुक्तता और कार्य की विभिन्न प्रकृति उजागर करना जरूरी होगा। कोई अधिकारी अपने जिले, गृह नगर या किसी ऐसे जिले में तैनात नहीं किया जाना चाहिए। संभव हो पति या पत्नी यदि दोनों न्यायिक अधिकारी होते हैं, इस स्थिति में एक ही जिले या आसपास के जिलों में तैनात किया जा सकता है। साथ ही गंभीर बीमारी से पीड़ित न्यायिक अधिकारी या जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं, उनकी सुविधाजनक जगहों पर तैनाती हो सकती है।
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न्यायिक अधिकारी दो साल में एक बार हस्तांतरणीय होते हैं, यानी तैनाती का कार्यकाल सामान्य तौर पर दो साल का होता है, लेकिन यदि परिवाद आता है तो उन्हें पहले स्थानांतरित किया जा सकता है। एक हार्ड स्टेशन जिले में एक न्यायिक अधिकारी की पोस्टिंग की अवधि केवल एक वर्ष की होगी। इसमें बनी, माहौर, गंदोह, गूल, कोटरंका, बुद्धल, पोरा, उड़ी, तंगधार, गुरेज, लेह, नुबरा, खलसी, कारगिल, द्रास, संकू और जंस्कार प्रमुख स्टेशन शामिल हैं। लेह और कारगिल दुर्गम स्टेशनों के रूप में वर्गीकृत किए गए हैं। कोई भी अधिकारी जो हार्ड स्टेशन जिले में तैनात है। किसी अन्य ऐसे स्टेशन में तैनात नहीं किया जाएगा। जब तक चार साल पूरे नहीं हो जाते।
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न्यायिक अधिकारी को जिला न्यायाधीश के अलावा दो बार उसी जिले में तैनात नहीं किया जाएगा। अधिकारियों के स्थानांतरण को प्रभावित करने के लिए रजिस्ट्रार जनरल न्यायिक अधिकारियों से स्थानांतरित होने की संभावना वाले स्टेशनों के अग्रिम तीन विकल्प प्राप्त करेंगे। स्थानांतरण मसले को मुख्य न्यायाधीश समिति के पास रखा जाएगा। सिविल जज, जूनियर डिवीजन सिविल जज, सीनियर डिवीजन और जिला जज के रूप में काम करते हुए प्रतिनियुक्ति पर किसी भी अधिकारी की नियुक्ति नहीं की जाएगी।

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