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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu and Kashmir: Hindi is the language of the mind, enhances understanding, also binds each other as the national language

जम्मू-कश्मीर: हिंदी मन की भाषा, समझ बढ़ाती है, एक-दूसरे से बांधती भी है राष्ट्रभाषा

Sun, 22 Aug 2021 11:14 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Sun, 22 Aug 2021 11:14 PM IST
सार

युवा शोधार्थी व छात्र बोले, जम्मू-कश्मीर में हिंदी प्रसार के लिए पत्रिकाओं, संस्थानों की जरूरत। शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रभाषा पर निबंध, कहानी लेखन स्पधाएं करवाई जाएं।

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Jammu and Kashmir: Hindi is the language of the mind, enhances understanding, also binds each other as the national language
भाषा (सांकेतिक तस्वीर)

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए अर्ध मासिक, मासिक, अर्ध वार्षिक, वार्षिक पत्रिकाओं को बढ़ावा देने के साथ संस्थानों को आगे आने की जरूरत है। इसके अलावा विश्वविद्यालय, स्कूल-कॉलेजों में हिंदी साहित्यकारों की जन्मशताब्दी पर कहानी और काव्य पाठ कराया जाए। जम्मू संभाग के युवा शोधार्थियों और छात्रों के अनुसार हिंदी मन की भाषा है। इससे आपसी समझ बढ़ती है।

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साथ ही एक-दूसरे को बांधने का सशक्त माध्यम है। देश के किसी भी कोने में हिंदीभाषी मिल जाएंगे। शैक्षणिक संस्थानों में निबंध, कहानी लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन करने से राष्ट्रभाषा हिंदी प्रदेश में समृद्ध हो सकेगी। हिंदी को सशक्त बनाने के लिए प्रदेश के शोधार्थी और युवा साहित्यकार विन्नि पत्रिकाओं और संस्थानों को शुरू करने की जरूरत समझ रहे हैं।
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स्कूल-कॉलेज स्तर पर निबंध लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन होने से हिंदी का विकास होगा। हिंदी साहित्यकारों के जन्मदिवस पर कहानी और काव्य पाठ करवाए जाने चाहिए। स्कूल-कॉलेज स्तर पर वार्षिक या अर्ध वर्षिक पत्रिकाओं के माध्यम से भी हिंदी भाषा को जम्मू-कश्मीर में बढ़ावा दिया जा सकता है। इसके लिए शिक्षण संस्थानों को आगे आना होगा। - समिति शर्मा, शोधार्थी, केंद्रीय विवि जम्मू
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जम्मू-कश्मीर में कला अकादमी के द्वारा शिराजा पत्रिका हिंदी में प्रकाशित की जाती है। इसके अलावा प्रदेश में हिंदी के युवा साहित्यकारों के लिए कोई पत्रिका प्रकाशित नहीं होती। इनकी जरूरत अहम है, ताकि युवाओं को लिखने में अधिक प्रोत्साहन मिल सके। जम्मू-कश्मीर के यूटी बनने के बाद उम्मीद जगी है कि हिंदी को बढ़ावा मिल सकेगा। यहां हिंदी अकादमी खोलने की जरूरत है। - काजल देवी, शोधार्थी, जम्मू विश्वविद्यालय

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हिंदी पढ़ने वाले सभी लोग राष्ट्रभाषा से प्रेम करते हैं, लेकिन रोजगार के क्षेत्र में अंग्रेजी के महत्व को देखकर उदासीनता है। प्रदेश में जितने आवेदन पत्र निकलते हैं। उनमें अंग्रेजी वैकल्पिक विषय रखा गया है। इसलिए प्रदेश में हिंदी का प्रचार-प्रसार करने के लिए सूचना पट्ट, पत्रों, दस्तावेजों में हिंदी का प्रयोग करना चाहिए। 14 सितंबर को हिंदी दिवस का सभी सरकारी कार्यालयों में आयोजन किया जाना चाहिए, ताकि हिंदी में युवा पीढ़ी की रुचि बढ़े। - राधा रुकवाल, स्नातकोत्तर छात्रा, केंद्रीय विवि जम्मू

शैक्षणिक संस्थानों में अध्यापकों को हिंदी के लाभ के बारे में बताना चाहिए, ताकि बच्चे हिंदी बोलने पर गर्व महसूस कर सकें। सभी कार्यालयों में पत्रों, दस्तावेजों इत्यादि को हिंदी में प्रकाशित करना होगा। विश्वविद्यालयों, स्कूल-कॉलेजों  में राष्ट्रभाषा को लेकर साप्ताहिक व्याख्यान का आयोजन होना चाहिए। विद्यालयों में नाटक प्रस्तुत किए जाने चाहिए। ऐसा करने से बच्चों के मन में हिंदी के प्रति अच्छी भावना पैदा होगी। - रिया गुप्ता स्नातकोत्तर छात्रा, जम्मू विश्वविद्यालय

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