JK: राज्यपाल ने वित्त मंत्री से लगाई मदद की गुहार
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गवर्नर एन एन वोहरा ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात कर विशेष आर्थिक पैकेज की गुहार लगाई है। रियासत के वित्तीय संकट का हवाला देते हुए गवर्नर ने कहा कि योजनाएं प्रभावित हो रही हैं और सरकार की देनदारी बढ़कर दो हजार करोड़ से अधिक हो गई है।
सरकार का दैनिक कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। दिल्ली में हुई इस मुलाकात में जेटली ने उदार मदद का भरोसा दिया है। जेटली ने कहा कि वह इस मुद्दे पर मंत्रालय में विचार विमर्श कर जल्द कोई ठोस कदम उठाएंगे। गवर्नर ने विशेष योजना सहायता मद की 1160 करोड़ रुपये भी तुंरत जारी करने की मांग की ताकि वर्तमान में चल रहे विकास प्रोजेक्टों को पूरा किया जा सके।
गवर्नर और केंद्रीय वित्त मंत्री की मुलाकात के बाद तय किया गया है कि रियासत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम केंद्रीय वित्त मंत्रालय के सचिव से बैठक करेगी। इस बैठक में रियासत सरकार की जरुरतों को विस्तार से बताया जाएगा ताकि समय बद्ध तरीके से आर्थिक मदद हासिल की जा सके।
रियासत सरकार कर्ज के बोझ में दबी
राजभवन के प्रवक्ता के अनुसार गवर्नर ने विशेष पैकेज के अलावा अतिरिक्त मदद की भी मांग की है। रियासत को वित्तीय संकट से बाहर निकालने के लिए यह जरूरी है। वोहरा ने कहा कि रियासत सरकार कर्ज के बोझ में दबी है। सरकार पर ऋणात्मक बैलेंस का बड़ा बोझ है।
बाढ़ की विभीषिका के बाद संकट और बढ़ा है। बाढ़ से जानमाल का भारी नुकसान हुआ। निजी संपत्ति के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियों और इंफ्रास्ट्रक्चर को बाढ़ ने तबाह किया है। इससे रियासत का आर्थिक संतुलन बिगड़ गया है और वित्तीय गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं।
राज्यपाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री के समक्ष आर्थिक स्थिति का विस्तृत ब्योरा पेश किया। केंद्र द्वारा मंजूर योजनाओं और आवंटित राशि में लगभग 5 हजार करोड़ का गेप है यानि केंद्र से अबतक 5 हजार करोड़ रुपये जारी नहीं किए गए हैं।
जेटली ने गवर्नर के तर्कों को गंभीरता से लिया
रियासत के कोषागारों में लगभग 2000 करोड़ से भी अधिक के बिल लंबित है जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है। जेटली ने गवर्नर के तर्कों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र इस मुद्दे पर सहानुभूतिपूर्वक और संवेदनशील तरीके से विचार करेगी। इस संबंध जल्द व्यवस्था की जाएगी।
राज्यपाल की केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात संभव है। इस मुलाकात में बाढ़ पीड़ितों के लिए विशेष पैकेज का मुद्दा उठाया जाएगा। उमर अब्दुल्ला की सरकार ने इस मद में 44 हजार करोड़ रुपये के पैकेज की मांग की थी।
इस मांग के बाद केंद्रीय टीम के रियासत में दौरे हुए लेकिन बाद में कोई फैसला नहीं लिया जा सका। वार्षिक योजना की मंजूरी भी महीनों लंबित रही। इससे हालात बिगड़े। नतीजतन रियासत सरकार को दैनिक जरुरतों के लिए बाजार से 1800 करोड़ का ऋण लेना पड़ा है।