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जम्मू-कश्मीर : वीडीजी गठन के फैसले से सीमा पार बढ़ी बौखलाहट, फिर झल्लाया पाकिस्तान
Sat, 05 Mar 2022 04:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 05 Mar 2022 04:12 AM IST
सार
ड्रोन एवं आतंकी घुसपैठ, सुरंग खोदने और नारको टेरर की साजिशों के मिले इनपुट। सरहदी इलाकों के चप्पे-चप्पे से वाकिफ वीडीजी आतंक की साजिशें करेंगे नाकाम।
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
गांव सुरक्षा समूह (वीडीजी) को दोबारा सक्रिय करने के केंद्र के फैसले से पाकिस्तान फिर बौखला गया है। खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन गतिविधियां व आतंकी घुसपैठ की कोशिशें तेज कर सकता है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि वीडीजी से ये साजिशें नाकाम होंगी।
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कठुआ, सांबा, आरएस पुरा और अखनूर के साथ ही राजोरी-पुंछ में घुसपैठ की साजिशों को नाकाम करने में वीडीजी गठन का फैसला मददगार साबित होगा। नारको टेररज्मि और सीमा पार से नशे की खेप भेजे जाने की साजिशों पर ब्रेक लग सकता है। वीडीजी के सदस्य पगडंडियों और इलाके के चप्पे-चप्पे की जानकारी रखते हैं। ऐसे में सीमा पार की साजिशों को समय रहते नाकाम करने में मदद मिलेगी।
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सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान को इस बात का डर है कि गांव-गांव में सुरक्षा समूह बन जाने से सीमा पार के इशारे पर काम करने वाले ओजीडब्ल्यू व स्लीपर सेल मॉड्यूल की गतिविधियां लगभग बंद हो जाएंगी। इसके चलते सीमा पार की साजिशों को नाकाम किया जा सकेगा। साजिशों का फौरन पता लग जाएगा। इस वजह से आईएसआई के इशारे पर खासकर जैश-ए-मोहम्मद व लश्कर-ए-ताइबा अपनी गतिविधियां बढ़ा सकता है। इसके तहत ड्रोन से हथियार गिराने की गतिविधियां, आतंकी घुसपैठ और नशे की तस्करी की कोशिशें बढ़ सकती हैं।
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चिनाब व पीरपंजाल से पलायन रोकने में मददगार
1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़ने के लिए मजबूर करने के बाद आतंकी संगठनों और दहशतगर्दों ने जम्मू संभाग के पहाड़ी इलाकों के हिंदुओं को निशाना बनाने की साजिश रची थी। इसके तहत नरसंहार की घटनाएं यहां भी हुईं। 1993 में किश्तवाड़ में 13 हिंदुओं की सामूहिक हत्या कर दी गई। इसके बाद चिनाब और पीर पंजाल वैली से हिंदुओं का पलायन भी शुरू हो गया। कश्मीरी पंडितों के बाद दूसरे पलायन को रोकने के लिए वीडीसी का गठन किया गया ताकि वह दहशतगर्दों से मुकाबला कर सकें।
इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए। गांव सुरक्षा समितियां (वीडीसी-अब वीडीजी) गठित करने वाले पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद का कहना है कि वीडीसी की बदौलत ही चिनाब और पीरपंजाल घाटी से आतंकवाद समाप्त हो सका। डोडा, किश्तवाड़ व रामबन को आतंकवाद मुक्त घोषित किया जा सका। डोडा के दूरदराज इलाके में वीडीसी सदस्य रातभर आतंकियों से मुकाबला तब तक करते रहे जब तक कि फोर्स नहीं पहुंच जाती थी। केंद्र सरकार की ओर से दोबारा इसे सक्रिय करने का प्रयास स्वागत योग्य है। इससे आतंकवाद और आतंकी घटनाओं पर अंकुश लगेगा।
बागनकोट में ग्रामीणों ने कुल्हाड़ी से दो आतंकियों को मार गिराया था तब बनी वीडीसी
डॉ. एसपी वैद बताते हैं कि 1995 में उधमपुर (अब रियासी) के बागनकोट में आतंकियों ने हमला कर दो ग्रामीणों की हत्या कर दी। वह उस वक्त एसएसपी थे। सूचना मिलने पर वह फोर्स के साथ पहुंचे तो ग्रामीण सड़क पर ही मिल गए। उन्होंने बताया कि आतंकी अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे। उन्होंने हमारे दो लोगों की हत्या कर दी। हमारे पास हथियार नहीं थे, लेकिन कुल्हाड़ी व घास काटने वाले दराती से उन्होंने दो आतंकियों को मार गिराया है। आतंकी मारे गए साथियों का शव हमारे घोड़े लेकर निकल गए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि इस दहशत भरी जिंदगी से वे परेशान हो गए हैं।
हमें सरकार हथियार दे, हम आतंकियों से मुकाबला करने को तैयार हैं। इसके बाद उन्होंने पुलिस लाइन से 10 थ्री नॉट थ्री राइफलें मंगाकर ग्रामीणों को दीं। चूंकि सरकार की ओर से अनुमति नहीं ली गई थी। इस वजह से प्रस्ताव बनाकर दिया गया और इसके बाद वीडीसी गठन का रास्ता साफ हुआ। उन्होंने बताया कि सेना और सीआरपीएफ हर गांव में नहीं हो सकती। ऐसे में गांवों को सुरक्षित रखने में इनकी भूमिका अहम रही है। इन पर कई हमले हुए हैं। कई वीडीसी सदस्य शहीद भी हुए।