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J&K: देशभर में आतंकी हमले करने की फिराक में था सुंजवां हमले का मास्टरमाइंड वकास

Mon, 12 Mar 2018 09:45 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,जम्मू
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,जम्मू Updated Mon, 12 Mar 2018 09:45 PM IST
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jaish commander mufti waqas plan to attack in all over india
indian army - फोटो : AMAR UJALA
सुंजवां हमला समेत अन्य पांच फिदायीन हमले का मास्टरमाइंड मुफ्ती वकास के मारे जाने के बाद कई अहम खुलासे हुए हैं। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद रियासत के अलावा देश के अन्य हिस्सों को दहलाने की नापाक साजिश रच रहा था।
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राजधानी श्रीनगर से मात्र 21 किमी. दूर वकास जो अबु अंसार के कोड नेम से सक्रिय रहता था। पांच मार्च को पुलवामा के हट्टीपोरा इलाके में जम्मू कश्मीर पुलिस और सेना के एक संयुक्त ऑपरेशन में मार गिराया गया। 10 फरवरी को सुंजवां सैन्य कैंप हमले के बाद वो लगातार सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था।
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वह लगातार पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को अपडेट दे रहा था। साथ ही वकास उन्हें अगला हमला देश के अन्य हिस्सों में करने की बात भी कह रहा था। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंकी मुफ्ती वकास को मार गिराने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया था।
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युवाओं को बरगला कर उन्हें फिदायीन बनाने की कला में माहिर आतंकी वकास को किलिंग मशीन का उपनाम भी दिया गया था। 30-31 दिसंबर 2017 को दक्षिण कश्मीर के लेथपोरा में सीआरपीएफ कैंप पर हुए फिदायीन हमले में पांच जवान शहीद हुए थे।

जबकि जवाबी कार्रवाई में एक पाकिस्तानी समेत तीन आतंकियों को मार गिराया गया था। फिदायीन आतंकी बनाने का उस्ताद वकास अभी और कई फिदायीन हमलावर बनाने की क्षमता रखता था।सूत्रों के मुताबिक उसने तीन कश्मीरी युवाओं का चयन भी कर लिया था। उन्होंने पिछले साल ही आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का दामन थामा था।

आतंक प्रभावित कश्मीर घाटी में सबसे युवा आईजी के तौर पर तैनात स्वयं प्रकाश वानी ने पांच मार्च को हुए मात्र 20 मिनट कीमुठभेड़ में मुफ्ती वकास को मार गिराने वाले ऑपरेशन के बारे में जानकारी देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि नूर मोहम्मद तांत्रे, तलहा रशीद और अब मुफ्ती वकास के मारे जाने से जैश काफी हद तक प्रभावित हुआ है।

वकास की अगली रणनीति देश के अन्य हिस्सों में आतंकी वारदातों को अंजाम देने की थी। उसके फोन को जांच के लिए भेजा गया है। जांच में पता चला है कि वो लगातार कुछ लोगों के संपर्क में था जो जैश के आतंकी के तौर पर माने जा रहे हैं।

पांच मार्च को मिली सफलता के पीछे घाटी के संवेदनशील इलाके त्राल जो अब जैश के गढ़ के रूप में सामने आ रहा है, वहां लगातार चल रहे तलाशी अभियान से मिली। इसी तलाशी अभियान से बचने के लिए वकास त्राल से निकल गया। कुछ दिनों तक इधर उधर रहने के बाद वकास ने हट्टीपोरा को अपने ठिकाने के तौर पर चुना।

क्योंकि यहां से मध्य कश्मीर के बड़गाम में पहुंचना आसान था। वकास को घेरने से पहले पुलिस ने सेना और सीआरपीएफ की मदद से घेरे को और सख्त बना दिया।इस ऑपरेशन में शामिल एक आधिकारी ने बताया कि यह आपरेशन मेक ऑर ब्रेक का था।

अगर हम उसे जिंदा पकड़ते तो उससे कई खुफिया जानकारी हासिल करने का एक अच्छा मौका हाथ लग सकता था, लेकिन अगर वो मारा जाता तो जैश बुरी तरह टूट जाता।

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