चुनावी पिच पर चौका लगाने की जुगत
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चुनावी पिच पर चौका और हैट्रिक लगाने के सपने के साथ कई दिग्गज शनिवार को जनता की अदालत में होंगे। सबके सामने अपने लक्ष्य को पाने की चुनौती होगी। आखिरी चरण में 20 सीटें हैं जिससे सरकार का भविष्य तय होगा। भाजपा पिछले चुनाव में सबसे बड़ी प्लेयर रही है।
चुनाव भाजपा और कांग्रेस की जनता के बीच लोकप्रियता एवं स्वीकार्यता का पैमाना भी बनेगा। नेकां और पीडीपी के समक्ष अपने वजूद को बचाने की चुनौती होगी। 2014 के चुनाव में रियासत के उप मुख्यमंत्री ताराचंद चौका लगाने के सपने के साथ छंब सीट से जोर आजमा रहे हैं।
वे यहां से 1996, 2002 और 2008 में विधायक रह चुके हैं। इस बार फिर कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं। जम्मू में कांग्रेस के बड़े चेहरे के रूप में इनकी ख्याति है।
इनके भी हैं कुछ अरमान
गांधीनगर सीट से आवास मंत्री और कांग्रेस प्रत्याशी रमन भल्ला हैट्रिक लगाने की चाह में हैं। बिलावर से कांग्रेस प्रत्याशी एवं सहकारिता राज्य मंत्री मनोहर लाल शर्मा, बिश्नाह से भाजपा प्रत्याशी अश्विनी शर्मा और कालाकोट से नेकां प्रत्याशी रछपाल सिंह भी हैट्रिक जड़ने की फिराक में हैं।
सभी ने एड़ी चोटी का जोर लगा रखा है। भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बावजूद विधायक जगदीश राज सपोलिया बसोहली और बनी से विधायक लालचंद, अखनूर से पीएचई मंत्री शाम लाल कांग्रेस के टिकट पर दोबारा मैदान में हैं।
ज्ञात हो कि 20 सीटों में से भाजपा का 11, कांग्रेस का पांच, नेकां का दो और पीडीपी का एक सीट पर कब्जा है। एक निर्दलीय भी काबिज है। सभी पार्टियां बेहतर प्रदर्शन के लिए पिछले डेढ़ महीने से रात-दिन एक किए हुए हैं।
राज परिवार की भी प्रतिष्ठा दांव पर
अंतिम 20 सीटों के परिणाम से राज परिवार की प्रतिष्ठा भी जुड़ी हुई है क्योंकि राजा हरि सिंह के बेटे डा. कर्ण सिंह के दोनों पुत्र यहां की सक्रिय राजनीति में हैं।
छोटे बेटे अजातशत्रु भाजपा के साथ हैं तो बड़े बेटे विक्रमादित्य ने जम्मू संभाग में पीडीपी के स्टार प्रचारक के रूप में पूरे चुनाव अभियान की बागडोर संभाले रखी।