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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   J&K High Court: Cannot remove adhoc worker and make new appointment, no bar for permanent employee

जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट: एडहॉक कर्मी को हटाकर नई नियुक्ति नहीं कर सकते, स्थायी कर्मचारी के लिए कोई रोक नहीं

Thu, 08 Dec 2022 02:18 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: विमल शर्मा Updated Thu, 08 Dec 2022 02:18 AM IST
सार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने शेर-ए कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स) में स्टाफ नर्स के लिए तदर्थ नियुक्तियों के लिए 17 नवंबर को जारी अधिसूचना को रद्द कर दिया। न्यायाधीश संजय धर ने कहा, तदर्थ नियुक्तियों के तहत सेवाएं दे रहे कर्मी तभी हटाए जा सकते हैं, जब उस पर पर स्थायी कर्मचारी की नियुक्ति की जा रही हो।

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J&K High Court: Cannot remove adhoc worker and make new appointment, no bar for permanent employee
highcourt srinagar - फोटो : फाइल

विस्तार

सरकारी विभागों में एडहॉक (तदर्थ) व्यवस्था के तहत नियुक्त कर्मी को किसी दूसरे एडहॉक कर्मी को नियुक्त करने के लिए नहीं हटाया जा सकता। यह तभी किया जाए जब रिक्त पद पर स्थायी नियुक्ति करनी हो।

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इस आदेश के साथ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने शेर-ए कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स) में स्टाफ नर्स के लिए तदर्थ नियुक्तियों के लिए 17 नवंबर को जारी अधिसूचना को रद्द कर दिया।
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न्यायाधीश संजय धर ने कहा, तदर्थ नियुक्तियों के तहत सेवाएं दे रहे कर्मी तभी हटाए जा सकते हैं, जब उस पर पर स्थायी कर्मचारी की नियुक्ति की जा रही हो। अन्यथा संबंधित अथॉरिटी के पास तदर्थ व्यवस्था के तहत ही पहले से सेवारत कर्मी को हटाकर नई नियुक्ति करने का अधिकार नहीं है।
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न्यायाधीश ने सर्वोच्च न्यायालय की ओर से समय समय पर दी गई व्यवस्था का हवाला देकर कहा, नियमित कर्मी की नियुक्ति पर ही तदर्थ कर्मी को हटाया जा सकता है। 

यह था मामला

इस मामले में याची पक्ष ने कहा, उन्हें 28 अप्रैल को नियुक्त किया गया था। स्टाफ नर्स के तौर पर उनकी सेवाएं छह माह अथवा स्थायी रूप से पद भरने तक जारी रहेंगी। छह माह का समय खत्म होने के बाद उनकी सेवाओं को विस्तार दिया गया। 22 नवंबर 2022 को भी उनकी सेवाओं को विस्तार मिला।

लेकिन इसी दौरान 17 नवंबर को अधिसूचना जारी कर तदर्थ नियुक्तियों के लिए आवेदन मांग लिए गए। कोर्ट ने कहा, उक्त अधिसूचना को रद्द किया जाता है, लेकिन इन पदों पर स्थायी नियुक्ति करने पर कोई रोक नहीं होगी।

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