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हिंसा के चलते जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल को बदलने का फैसला टला
ब्यूरो, अमर उजाला/नई दिल्ली
Updated Thu, 01 Sep 2016 01:18 AM IST
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गवर्नर एनएन वोहरा
- फोटो : PTI
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केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि घाटी के अनिश्चित और नाजुक हालात को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा को फिलहाल नहीं बदला जाएगा।
हालांकि, राज्यपाल के पद के लिए कश्मीर मामले में वोहरा जैसे तजुर्बेकार और उपयुक्त व्यक्ति का नहीं मिलना इसका एक कारण माना जा रहा है। इस मामले में बुधवार को कैबिनेट की बैठक में भी चर्चा हुई।
शांति बहाली की कोशिश में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे के साथ बैक चैनल बातचीत की प्रक्रिया में सरकार उनकी सूझबूझ और लंबे अनुभव का इस्तेमाल करना चाहती है। सरकार ने वोहरा से अपने पद पर बने रहने की गुजारिश की है।
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हालांकि, राज्यपाल के पद के लिए कश्मीर मामले में वोहरा जैसे तजुर्बेकार और उपयुक्त व्यक्ति का नहीं मिलना इसका एक कारण माना जा रहा है। इस मामले में बुधवार को कैबिनेट की बैठक में भी चर्चा हुई।
शांति बहाली की कोशिश में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे के साथ बैक चैनल बातचीत की प्रक्रिया में सरकार उनकी सूझबूझ और लंबे अनुभव का इस्तेमाल करना चाहती है। सरकार ने वोहरा से अपने पद पर बने रहने की गुजारिश की है।
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मौजूदा हालात में गवर्नर बदलने से जाएगा गलत संदेश
गवर्नर एनएन वोहरा
- फोटो : PTI
गौरतलब है कि 2008 से लगातार जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के पद पर आसीन एन एन वोहरा ने अवकाश लेने का अनुरोध किया था। उच्च पदस्थ सरकारी सूत्रों के मुताबिक कश्मीर में हालात सामान्य करने की कोशिश में कई स्तर पर नई पहल हो रही है।
इसमें भारत विरोधी तत्वों पर सख्ती के साथ संबंधित पक्षों से सीधे या परोक्ष रुप से बातचीत की जा रही है। ऐसे जटिल हालात में राज्यपाल के पद पर वोहरा जैसे लंबे तजुर्बे और कश्मीर के स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मामले में पैनी सूझबूझ रखने वाले शख्स का होना अहम है।
सूत्रों के मुताबिक इसके लिए हालांकि उपयुक्त शख्स की तलाश जरूर की जा रही थी। लेकिन, फिलहाल वोहरा को ही पद पर बने रहा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि इस नाजुक वक्त में राज्यपाल बदलने से गलत संदेश भी जाने का अंदेशा है।
इसमें भारत विरोधी तत्वों पर सख्ती के साथ संबंधित पक्षों से सीधे या परोक्ष रुप से बातचीत की जा रही है। ऐसे जटिल हालात में राज्यपाल के पद पर वोहरा जैसे लंबे तजुर्बे और कश्मीर के स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मामले में पैनी सूझबूझ रखने वाले शख्स का होना अहम है।
सूत्रों के मुताबिक इसके लिए हालांकि उपयुक्त शख्स की तलाश जरूर की जा रही थी। लेकिन, फिलहाल वोहरा को ही पद पर बने रहा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि इस नाजुक वक्त में राज्यपाल बदलने से गलत संदेश भी जाने का अंदेशा है।