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कश्मीर में बंद इंटरनेट ने लगाई पत्थरबाजों पर लगाम
एजेंसी/श्रीनगर
Updated Mon, 24 Apr 2017 08:47 AM IST
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कश्मीर घाटी में हिंसक प्रदर्शन
- फोटो : File Photo
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घाटी में सेना की आतंकियों से मुठभेड़ को बाधित करने के दौरान पत्थरबाज अपनी गतिविधियों को शुरू कर देते हैं।
इसके लिए 300 व्हाट्सएप ग्रुप सिर्फ रेल पटरियों से पत्थर जमा इकट्ठा करने का काम करते थे। प्रत्येक ग्रुप में 250 पत्थरबाज होते थे जो पत्थरों का ढेर लगाते थे। अब इनमें से 90 फीसदी से ज्यादा व्हाट्सएप ग्रुप बंद हो गए हैं। यह सिर्फ घाटी में इंटरनेट सेवाएं बंद होने के चलते ही संभव हो पाया है। इसका नतीजा शनिवार को बडगाम में आतंकी मुठभेड़ में सामने आया है।
इस मुठभेड़ में सेना ने लश्कर के दो आतंकियों को ढेर करने में सफलता पाई। इस दौरान सेना के अभियान में कोई व्यवधान नहीं पड़ा। यह जानकारी सेना के एक अधिकारी ने दी।
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इसके लिए 300 व्हाट्सएप ग्रुप सिर्फ रेल पटरियों से पत्थर जमा इकट्ठा करने का काम करते थे। प्रत्येक ग्रुप में 250 पत्थरबाज होते थे जो पत्थरों का ढेर लगाते थे। अब इनमें से 90 फीसदी से ज्यादा व्हाट्सएप ग्रुप बंद हो गए हैं। यह सिर्फ घाटी में इंटरनेट सेवाएं बंद होने के चलते ही संभव हो पाया है। इसका नतीजा शनिवार को बडगाम में आतंकी मुठभेड़ में सामने आया है।
इस मुठभेड़ में सेना ने लश्कर के दो आतंकियों को ढेर करने में सफलता पाई। इस दौरान सेना के अभियान में कोई व्यवधान नहीं पड़ा। यह जानकारी सेना के एक अधिकारी ने दी।
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कई समूहों को परामर्श के लिए बुलाया
KASHMIR
- फोटो : PTI
सेना अधिकारी ने कहा कि हमने समूहों और समूह प्रशासकों की पहचान की, जिन्हें पुलिस ने परामर्श के लिए बुलाया था। हमें इस पहल पर अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।
इंटरनेट सेवाओं के बिना पत्थरबाजों की भीड़ नहीं जुटाई जा सकी, जिससे सेना ने अपना काम आसानी से कर लिया। सेना अधिकारी ने कहा कि युवाओं में से कुछ ने सुरक्षा बलों द्वारा कथित उत्पीड़न जैसे व्यक्तिगत मुद्दों को उठाते हुए कहा, अधिकारियों को भी युवाओं के साथ व्यवहार करते समय मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
हालांकि, व्यवसाय से जुड़े घाटी के लोगों का कहना है कि इंटरनेट सेवा बंद होने से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि ज्यादातर व्यापारिक कार्य अब आनलाइन हो गए हैं। इसके लिए इंटरनेट जरूरी है।
इंटरनेट सेवाओं के बिना पत्थरबाजों की भीड़ नहीं जुटाई जा सकी, जिससे सेना ने अपना काम आसानी से कर लिया। सेना अधिकारी ने कहा कि युवाओं में से कुछ ने सुरक्षा बलों द्वारा कथित उत्पीड़न जैसे व्यक्तिगत मुद्दों को उठाते हुए कहा, अधिकारियों को भी युवाओं के साथ व्यवहार करते समय मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
हालांकि, व्यवसाय से जुड़े घाटी के लोगों का कहना है कि इंटरनेट सेवा बंद होने से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि ज्यादातर व्यापारिक कार्य अब आनलाइन हो गए हैं। इसके लिए इंटरनेट जरूरी है।