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घाटी के माहौल को सामान्य बनाने में जुटी सेना, कश्मीरियों का फौज पर बढ़ा भरोसा
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू
Updated Thu, 13 Oct 2016 02:22 PM IST
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कश्मीर में सेना की बड़ी कोशिश
- फोटो : File Photo
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पिछले तीन महीने से अधिक समय से अशांत घाटी में अमन बहाली का बीड़ा अब सेना ने अपने हाथों में लिया है। बंद स्कूलों को खुलवाने में मदद करने के साथ ही अवाम को दुकानें खोलने तथा सामान्य जनजीवन शुरू करने के लिए सेना की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं।
खासकर दक्षिणी कश्मीर का इलाका जो हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित है, वहां सेना ग्रामीणों के बीच जाकर विश्वास बहाली के लिए प्रयास कर रही है। सभी जिले, तहसील और गांवों में अवामी मुलाकात आयोजित की जा रही हैं। खास फोकस ग्रामीण इलाकों पर है। इसके जरिये सेना अवाम से माहौल को सामान्य बनाने में सहयोग की अपील कर रही है।
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खासकर दक्षिणी कश्मीर का इलाका जो हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित है, वहां सेना ग्रामीणों के बीच जाकर विश्वास बहाली के लिए प्रयास कर रही है। सभी जिले, तहसील और गांवों में अवामी मुलाकात आयोजित की जा रही हैं। खास फोकस ग्रामीण इलाकों पर है। इसके जरिये सेना अवाम से माहौल को सामान्य बनाने में सहयोग की अपील कर रही है।
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घाटी के बच्चों के साथ कैरम खेलने जाते हैं फौजी
कश्मीर में सेना की बड़ी कोशिश
- फोटो : File Photo
लोगों का विश्वास जीतने के लिए फिल्मी स्टाइल भी अपनाया जा रहा है। बॉलीवुड की चर्चित फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस के मुन्ना भाई की तरह सेना लोगों को जादू की झप्पी दे रही है। सैन्य अफसर धर्मेंद्र यादव सुबह ही अनंतनाग जिले के दूरदराज के गांवों में पहुंचकर बड़े-बुजुर्गों, युवाओं को गले लगाकर जादू की झप्पी दे रहे हैं।
इसके साथ ही सेना की ओर से विभिन्न गांवों में बच्चों के बीच कैरम और अन्य गेम भी खेले जा रहे हैं। क्रिकेट प्रतियोगिताएं कराई जा रही हैं। बच्चों को पठन-पाठन सामग्री वितरित करने के साथ ही गांव के शिक्षकों को प्रेरित कर बच्चों की पढ़ाई भी कराई जा रही है। इसका असर भी दिख रहा है।
इसके साथ ही सेना की ओर से विभिन्न गांवों में बच्चों के बीच कैरम और अन्य गेम भी खेले जा रहे हैं। क्रिकेट प्रतियोगिताएं कराई जा रही हैं। बच्चों को पठन-पाठन सामग्री वितरित करने के साथ ही गांव के शिक्षकों को प्रेरित कर बच्चों की पढ़ाई भी कराई जा रही है। इसका असर भी दिख रहा है।
घाटी में कम हुई पत्थरबाजी की घटनाएं
kashmir
- फोटो : PTI
घाटी में पत्थरबाजी की घटनाएं कम हुई हैं। धीरे-धीरे जनजीवन पटरी पर लौटने लगा है। स्कूल खुलने शुरू हो गए हैं। दुकानें भी खुल रही हैं। रेहड़ी-फड़ी वालों ने भी कारोबार शुरू कर दिया है। सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग ने भी अपने दौरे के दौरान अवाम के साथ संबंध बढ़ाने तथा उनकी हरसंभव मदद की हिदायत दी है।
लगातार आपरेशन सद्भावना के तहत ग्रामीणों की मदद की जा रही है। पढ़े-लिखे युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। मसलन कई युवाओं को गाड़ी फाइनेंस कराने में सहयोग के तौर पर डाउन पेमेंट खुद किया है। इसके बाद खुद कमाकर किस्त भरने को कहा है।
लगातार आपरेशन सद्भावना के तहत ग्रामीणों की मदद की जा रही है। पढ़े-लिखे युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। मसलन कई युवाओं को गाड़ी फाइनेंस कराने में सहयोग के तौर पर डाउन पेमेंट खुद किया है। इसके बाद खुद कमाकर किस्त भरने को कहा है।
गुडविल स्कूल से संवारा जा रहा बच्चों को भविष्य
Army Goodwill School
- फोटो : File Photo
सेना की ओर से विभिन्न जिलों में गुडविल स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। बच्चों को स्मार्ट कक्षाओं में आधुनिक सुविधाओं के साथ पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। टंगधार जैसे सुदूरवर्ती इलाके में भी गुडविल स्कूल चल रहे हैं।
पिछले तीन महीने से जहां घाटी के स्कूल बंद पड़े हैं और सरकारी स्कूल के विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, वहीं उड़ी में सेना का केंद्रीय विद्यालय निर्बाध रूप से चल रहा है। यहां इन दिनों परीक्षाएं हो रही हैं। विद्यालय की छात्रा संजना का कहना है कि वर्तमान हालात का उसकी पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ा। रोजाना कक्षाएं लगीं और अब तो परीक्षा भी हो रही है।
पिछले तीन महीने से जहां घाटी के स्कूल बंद पड़े हैं और सरकारी स्कूल के विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, वहीं उड़ी में सेना का केंद्रीय विद्यालय निर्बाध रूप से चल रहा है। यहां इन दिनों परीक्षाएं हो रही हैं। विद्यालय की छात्रा संजना का कहना है कि वर्तमान हालात का उसकी पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ा। रोजाना कक्षाएं लगीं और अब तो परीक्षा भी हो रही है।