अब भारत-पाक सीमा पर परिंदा भी नहीं मार सकेगा पर
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सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा प्रभाव कश्मीर से लगने वाली भारत पाकिस्तान की सीमा पर होगा । भारत की कुल 3323 किमी की अंतर्राष्ट्रीय सीमा में से 1225 किमी सीमा जम्मू-कश्मीर से लगी हुई है जिसमें एलओसी भी शामिल है । इसके अलावा राजस्थान में 1037 किमी पंजाब में 553 किमी और गुजरात में 508 किमी की अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं हैं ।
भारत सरकार ने इन सभी सीमाओं पर हाइटेक उपकरण और रक्षा से जुड़ी तकनीकी का प्रयोग करके इन्हें आतंकियों के लिए अभेद्य बनाने की तैयारी शुरू कर दी है ।
सीमा पर सुरक्षा को अभेद्य बनाने की तैयारी
इस क्रम में मंगलवार को दिल्ली में गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हम मधुकर गुप्ता कमेटी द्वारा की गई सिफारिशों को जल्द लागू करने के लिए गंभीर हैं ।
गौरतलब है कि पठानकोट में हुए आतंकी हमलों के बाद, सीमा पार से हो रही घुसपैठ को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर सुरक्षा बढाने के लिए जरूरी इंतजामों की जरूरत जानने के लिए केंद्र सरकार ने अप्रैल में पूर्व गृह सचिव मधुकर गुप्ता की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई थी ।
इस कमेटी ने पिछले हफ्ते अपनी रिपोर्ट गृहमंत्री राजनाथ सिंह को सौंपी है जिसके बाद सीमापर बढ़ते तनाव को देखते हुए सरकार जल्द से जल्द इस रिपोर्ट की सिफारिशों को क्रियान्वित कर देना चाहती है । सूत्रों के मुताबिक इस कमेटी ने सीमा पर सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिहाज से सरकार से कई महत्वपूर्ण इंतजाम करने की सिफारिश की है ।
इन इंतजामों से हाईटेक होगी सीमा पर सुरक्षा
जमीन के नीचे से किसी तरह की घुसपैठ को रोकने के लिए भूमिगत सेंसर और सीमा से सटे पूरे इलाके में राडार के जरिए निगरानी करने की सिफारिशें भी की गई हैं । सीमा पर इंतजामों के साथ साथ बीएसएफ को भी नई तकनीकी के हथियारों से लैस करने की तैयारी हो रही है ।
मल्टी एजेंसी सेंटर के गठन का भी सुझाव
पिछले दिनों से सीमा पार से हो रही घुसपैठ को देखते हुए भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से ये एक बड़ा कदम हो सकता है । बीते कुछ दिनों में सीमा पर आतंकी गतिविधियां बढ़ी हैं वहीं खुफिया एजेंसियों से भी फिदायीन आतंकियो के घुसपैठ की आशंकाओं के इनपुट मिले हैं ऐसे में सीमा पर सुरक्षा के ये कदम भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए बहुत बड़ी कवायद हो सकती है ।